प्रश्न 1- . अर्द्धचालक क्या होता है? दो अर्द्धचालकों के नाम लिखिए।
उत्तर : अर्द्धचालक- “वे पदार्थ जिनकी चालकता चालक एवं अचालक के बीच होती है, अर्द्धचालक कहलाते हैं।” जैसे- सिलिकॉन तथा जर्मेनियम।
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प्रश्न 2-. p-टाइप अर्द्धचालक से क्या तात्पर्य है? इसमें आवेश वाहक क्या होते हैं?
[2022]
उत्तर : p-टाइप अर्द्धचालक- “वह अर्द्धचालक जो शुद्ध अर्द्धचालक में 3 संयोजकता वाला अपद्रव्य अपमिश्रित करके बनाया जाता है, टाइप अर्द्धचालक कहलाता है।” इसमें बहुसंख्यक आवेश वाहक कोटर (धनात्मक) तथा अल्पसंख्यक आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन (ऋणात्मक) होते हैं।
प्रश्न 3-. n-टाइप अर्द्धचालक से क्या तात्पर्य है? इसमें आवेश वाहक क्या होते हैं?
उत्तर: n-टाइप अर्द्धचालक “वह अर्द्धचालक जो शुद्ध अर्द्धचालक में 5 संयोजकता वाला अपद्रव्य अपमिश्रित करके बनाया जाता है, n-टाइप अर्द्धचालक कहलाता है।” इसमें बहुसंख्यक आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन (ऋणात्मक) तथा अल्पसंख्यक आवेश वाहक कोटर (धनात्मक) होते हैं।
प्रश्न 4- कोटर किसे कहते हैं? यह किस प्रकार का व्यवहार करता है?
उत्तर : कोटर-“p-टाइप अर्द्धचालक में अपद्रव्य परमाणु के एक ओर इलेक्ट्रॉन की जो रिक्ति होती है वह कोटर कहलाता है।” यह धनावेशित कण के समान व्यवहार करता है।
प्रश्न 5. नाभिक की बन्धन ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर : नाभिक की बन्धन ऊर्जा- किसी नाभिक की बन्धन ऊर्जा वह बाह्य ऊर्जा है जो नाभिक के न्यूक्लिऑनों को परस्पर अलग-अलग करने के लिए आवश्यक होती है। किसी नाभिक की बन्धन ऊर्जा जितनी अधिक होगी, वह नाभिक उतना ही अधिक स्थायी होगा।
प्रश्न 6. नाभिकीय विखण्डन से आप क्या समझते हैं? इसे प्रदर्शित करने की एक समीकरण दीजिए।
‘उत्तर : नाभिकीय विखण्डन- जब किसी भारी नाभिक पर न्यूट्रॉनों की बमबारी की जाती है तो वह नाभिक लगभग दो बराबर नाभिकों में टूट और इसके साथ ही बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त होती है। इस प्रकार भारी नाभिकों के टूटने की प्रक्रिया को नाभिकीय विखण्डन कहते हैं l
प्रश्न 7. किसी पृष्ठ के लिए कार्यफलन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर : कार्यफलन- आपतित प्रकाश के एक फोटॉन की वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी धातु से प्रकाश इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए आवश्यक होती है, उस धातु का कार्यफलन कहलाती है। इसे ‘W’ से प्रदर्शित करते हैं। इसका मान भिन्न-भिन्न धातुओं के लिए भिन्न-भिन्न होता है।
प्रश्न 8 प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन अथवा प्रकाश-वैद्युत प्रभाव क्या है?
उत्तर : प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन अथवा प्रकाश-वैद्युत प्रभाव – जब किसी धातु के तल पर एक निश्चित आवृत्ति से अधिक आवृत्ति की प्रकाश किरणों (जैसे-पराबैंगनी प्रकाश) को डाला जाता है तो धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होने लगता है। इस घटना को प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन अथवा प्रकाश-वैद्युत प्रभाव कहते हैं।
प्रश्न 9 संयुग्मी बिन्दुओं से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: संयुग्मी बिन्द – वे बिन्द जिनमें एक बिन्दु पर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब दूसरे बिन्द पर बनता है संयुग्मी बिन्द कहलाते हैं।
प्रश्न 10. क्रान्तिक कोण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर : क्रान्तिक कोण-सघन माध्यम में बना वह आपतन कोण, जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° होता है क्रान्तिक कोण कहलाता है। इसे C’ से प्रदर्शित करते हैं।
प्रश्न 11. पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर : पूर्ण आन्तरिक परावर्तन – जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है और आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से अधिक हो जाता है तो विरल माध्यम में प्रकाश किरण का अपवर्तन नहीं होता बल्कि सम्पूर्ण प्रकाश परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही वापस लौट आता है। इस प्रकार के परावर्तन को पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।
प्रश्न 12. चुम्बकत्व का परमाण्वीय मॉडल क्या है?
उत्तर : चुम्बकत्व का परमाण्वीय मॉडल- पदार्थ का प्रत्येक परमाणु एक छोटा-सा चुम्बक है। परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के कक्षीय परिक्रमण तथा चक्रण के कारण परमाणु में चुम्बकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है। चुम्बकत्व के परमाण्वीय मॉडल में इलेक्ट्रॉन के कक्षीय परिक्रमण तथा चक्रण को चुम्बकत्व का मूल कारण माना गया है तथा इसी आधार पर विभिन्न पदार्थों के चुम्बकत्व की व्याख्या की जाती है। किसी परमाणु के चुम्बकत्व में इलेक्ट्रॉनों के परिक्रमण की तुलना में चक्रण का योगदान अधिक माना जाता है।
प्रश्न 13- कूलॉम का वैद्युत बल सम्बन्धी नियम लिखिए।
अथवा कूलॉम का विद्युत बल का नियम क्या है?
उत्तर: कूलॉम का नियम- इस नियमानुसार, “दो स्थिर बिन्द आवेशों के बीच लगने लाला आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल (F), दोनों आवेशों की मात्राओं (q 1 व q_{2} ) के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा दोनों आवेशों के बीच की दरी (r) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।” यह बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होता है l
प्रश्न 13. वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता की परिभाषा एवं मात्रक लिखिए।
[2015, 16, 17]
उत्तर : वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता “वैद्युत क्षेत्र में किसी बिन्दु पर रखे परीक्षण आवेश पर लगने वाले वैद्युत बल तथा परीक्षण आवेश के अनुपात को उस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता कहते हैं।” इसका मात्रक न्यूटन/कूलॉम है।
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