प्रश्न 1- क्षार धातुएँ प्रबल अपचायक क्यों होती हैं?
उत्तर : सभी क्षार धातुएँ विद्युत रासायनिक श्रेणी में निम्नतम स्थान पर स्थित हैं, क्योंकि इनके मानक इलेक्ट्रोड विभव के मान उच्च (ऋणात्मक) होते है, फलस्वरूप इनकी इलेक्ट्रॉन दान करके धनायन बनाने की प्रवृत्ति भी अधिक होती है, जिसके कारण ये प्रबल अपचायक होती हैं।
प्रश्न 2- कार्बोहाइड्रेट को परिभाषित कीजिए।
उत्तर : ऐसे पॉलिहाइड्रॉक्सी यौगिक जिनमें ऐल्डिहाइड या कीटोनिक समूह उपस्थित होते हैं, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं अथवा वे कार्बनिक यौगिक जो जल-अपघटन पर पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या पॉलिहाइड्रॉक्सी कीटोन देते हैं. कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं।
प्रश्न 3 – वसा में विलेय विटामिनों के नाम लिखिए।
उत्तर : विटामिन A, D, E तथा K वसा में विलेय होते हैं।
प्रश्न 4. वुट्रर्ज अभिक्रिया (Wurtz’s Reaction)
उत्तर – जब ऐल्किल हैलाइड के दो अणुओं को शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु के साथ अभिकृत करते हैं तो ऐल्केन प्राप्त होते हैं यह अभिक्रिया बुर्ज अभिक्रिया कहलाती है। इसका उपयोग मुख्यतः सममित (symmetric) ऐल्केन बनाने में होता है। प्राथमिक एवं द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड ही यह अभिक्रिया देते हैं।
प्रश्न 5- मोलरता तथा मोललता की परिभाषा दीजिए तथा इनमें अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : मोललता- 1000 ग्राम विलायक में घुले विलेय के ग्राम-अणुओं (मोलों) की संख्या को उस विलयन की मोललता कहते हैं।
मोलरता-किसी विलयन के 1000 मिली (या 1 लीटर) में घुले विलेय के ग्राम-अणुओं (मोलों) की संख्या को विलयन की मोलरता कहते हैं।
अन्तर-मोललता ताप के साथ परिवर्तित नहीं होती जबकि मोलरता ताप के साथ परिवर्तित होती है।
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1 – Physics important question
2- Chemistry important question
प्रश्न 6 मोल-अंश से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर : मोल-अंश-विलयन में उपस्थित किसी एक घटक या अवयव के मोलों की संख्या तथा विलेय एवं विलायक के कुल मोलों की संख्या के अनुपात को उस अवयव का मोल-अंश कहते हैं। इसे ‘X’ से व्यक्त करते हैं।
प्रश्न 7- मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड विभव को समझाइए।
उत्तर : मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड में, मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड को एक मोलर सान्द्रण वाले हाइड्रोजन आयन विलयन (1.0 M HCI) में डुबो दिया जाता है। इस विलयन में एक वायुमण्डल दाब पर शुद्ध हाइड्रोजन गैस की कुछ मात्रा प्लैटिनम की सतह पर अधिशोषित हो जाती है तथा शेष अम्ल के मोलर विलयन में विलीन हो जाती है। इस कारण प्लैटिनम इलेक्ट्रोड पर अधिशोषित हाइड्रोजन गैस तथा विलयन में विद्यमान हाइड्रोजन आयनों के मध्य साम्य स्थापित हो जाता है।
H 2 (g) → 2H ^ (aq) +2e^ –
इस इलेक्ट्रोड का स्वेच्छा से इलेक्ट्रोड विभव शून्य निर्धारित कर दिया जाता है। यह इलेक्ट्रोड हाइड्रोजन के मानक इलेक्ट्रोड विभव का कार्य करता है।
प्रश्न 8 – कोलराऊश के नियम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर – कोलराऊश का नियम – दुर्बल विद्युत-अपघट्यों की मोलर चालकता (अनन्त तनुता पर) की गणना करने के लिए कोलराऊश ने एक नियम प्रतिपादित किया जिसे आयनों के स्वतन्त्र अभिगमन का कोलेराऊश नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार, “अनन्त तनुता पर, किसी विद्युत अपघट्य की मोलर चालकता उसके नियम सभी धनायनों एवं ऋणायनों की आयनिक मोलर चालकता का योग होती है।”
प्रश्न 9- .तात्क्षणिक वेग क्या है? आप इसे कैसे ज्ञात करेंगे?
उत्तर : किसी निश्चित क्षण पर अभिक्रिया का वास्तविक वेग उसका तात्क्षणिक वेग कहलाता है। अभिक्रिया के तात्क्षणिक वेग को समय और सान्द्रता के मध्य खींचे गए ग्राफ की सहायता से भी ज्ञात करते हैं। समय व सान्द्रता के मध्य खींचे गए ग्राफ में किसी विशिष्ट समय और विशिष्ट सान्द्रता के संगत बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा का ढाल (slope), अभिक्रिया के तात्क्षणिक वेग को प्रदर्शित करता है।
इस प्रकार, जिस क्षण पर अभिक्रिया का तात्क्षणिक वेग ज्ञात किया जाना है, वक्र पर उससे सम्बन्धित बिन्दु पर एक स्पर्श रेखा खींचकर उसकी ढाल से अभिक्रिया का तात्क्षणिक वेग ज्ञात हो जाता है।
प्रश्न (10) राइमर-टीमैन अभिक्रिया (Reimer-Tiemann Reaction) ।
उत्तर – वह अभिक्रिया जिसमें फीनॉल, क्लोरोफॉर्म या कार्बन टेट्राक्लोराइड के साथ कॉस्टिक सोडा के जलीय विलयन की उपस्थिति में लगभग 333 K ताप पर अभिक्रिया द्वारा क्रमशः सैलिसिलिक ऐल्डिहाइड या सैलिसिलिक अम्ल मुख्य उत्पाद के रूप में देता हो, राइमर-टीमैन अभिक्रिया कहलाती
