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Class 12 Chemistry Chapter 4 – d और f Block Important Questions Answers

Class 12 chemistry chapter 4 important questions answers 

महत्त्वपूर्ण परिभाषाएं – 

▶ वे तत्व जिनमें विभेदी इलेक्ट्रॉन d-कक्षक में प्रवेश करता है, d-ब्लॉक के तत्व या संक्रमण तत्व कहलाते हैं।

▶ आवर्त सारणी में इनको s-तथा d-ब्लॉक के मध्य वर्ग 3 से वर्ग-12 में स्थान दिया गया है।

▶ संक्रमण तत्वों की चार श्रेणियाँ 3d, 4d, 5d तथा 6d हैं।

▶ सामान्यतः संक्रमण तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं तथा संकर आयन एवं रंगीन लवण बनाते हैं। ये चुम्बकीय गुण भी प्रदर्शित करते हैं।

▶ वे तत्व जिनमें विभेदी इलेक्ट्रॉन -कक्षक में प्रवेश करता है, f-ब्लॉक के तत्व या आन्तरिक संक्रमण तत्व कहलाते हैं।

▶ आवर्त सारणी में इन्हें मुख्य सारणी से पृथक् नीचे लैन्थेनाइड तथा ऐक्टिनाइड श्रेणियों के रूप में स्थान दिया गया है

प्रश्न 1- संक्रमण तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। क्यों? टिप्पणी करो।

[2017]UP Board 

उत्तर : संक्रमण तत्वों द्वारा परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करने का कारण उनके (n-1)d व ns-उपकोशों में इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति तथा d व s-उपकोशों के कोशों का अति निकट होना है। इस कारण संक्रमण तत्वों में से आन्तरिक कोश के इलेक्ट्रॉन आसानी से निकल जाते हैं और ऑक्सीकरण अवस्थाओं की संख्या बढ़ जाती है।

प्रश्न 2. अन्तरकाशी यौगिक क्या हैं? और अन्तरकाशी प्रकार के यौगिक संक्रमण धातु के लिए ज्ञात क्यों है उसके बारे में लिखिए।

उत्तर : वे यौगिक जिनके क्रिस्टल जालक में अन्तराकाशी स्थलों को छोटे आकार वाले परमाणु अध्यासित कर लेते हैं, अन्तराकाशी यौगिक कहे जाते हैं। अन्तराकाशी यौगिक संक्रमण धातुओं के लिए भली प्रकार से ज्ञात होते हैं, क्योंकि संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालकों में उपस्थित रिक्तियों (voids) में छोटे आकार वाले परमाणुः जैसे-H, N या C सरलता से सम्पाशित (trapped) हो जाते हैं।

प्रश्न 3- कौन-से तत्व ऐक्टिनाइड कहलाते हैं? इनके प्रमुख उपयोग या लक्षण लिखिए।

उत्तर :आवर्त सारणी में ऐक्टिनियम ( 89 Ac ) तथा इसके बाद स्थित 14 तत्वों ( 90 Th से 103 Lw ) को ऐक्टिनाइड कहते हैं। यह श्रेणी 5f-उपकोश में इलेक्ट्रॉनों के लगातार से बनती है।

उपयोग- इन तत्वों के महत्त्वपूर्ण उपयोग निम्नलिखित हैं-

(i) ये सभी तत्व अत्यन्त क्रियाशील धातुएँ हैं। अतः इनका प्रयोग प्रबल अपचायक के रूप में किया जाता है।

(ii) इनका उपयोग संकर यौगिकों के निर्माण हेतु किया जाता है।

प्रश्न 4- प्रथम संक्रमण श्रेणी में आयनन ऊर्जाओं (प्रथम तथा द्वितीय) के अनियमित क्रम की व्याख्या आप अपने शब्दों में करो।

उत्तर : संक्रमण तत्वों में आयनन ऊर्जाओं का अनियमित क्रम प्रेक्षित होता है। किसी श्रेणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है। आयनन एन्थैल्पी (ऊर्जा) में यह वृद्धि मुख्यतया नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण होती है। इसका कारण यह है कि अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश इलेक्ट्रॉन मेघ को प्रबलता से आकर्षित करता है। संक्रमण तत्वों में इलेक्ट्रॉन (n – 1) d-उपकोश में प्रवेश करता है जिस कारण परिरक्षण प्रभाव भी बढ़ता है। (n – 1) d-उपकोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने के साथ, बाह्यतम् ns इलेक्ट्रॉनों पर परिरक्षण प्रभाव भी बढ़ता है, परिणामस्वरूप आयनन ऊर्जा में वृद्धि को अवरोधित कर देता है। यह क्रम तथा ब्लॉक के तत्वों (प्रतिनिधि तत्वों) से अत्यधिक भिन्न होता है। किसी आवर्त में दो निकटवर्ती सदस्यों की आयनन ऊर्जाओं में पर्याप्त अन्तर होता है क्योंकि इन तत्वों में इलेक्ट्रॉन, उपकोश में प्रवेश करता है तथा इस इलेक्ट्रॉन पर आन्तरिक इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव नगण्य होता है। अन्तिम तत्व अर्थात् जिंक की आयनन ऊर्जा उच्च होती है क्योंकि इसमें पूर्णतः भरित कक्षकों की उपस्थिति के कारण इसका विन्यास सममित तथा स्थायी होता है।

प्रश्न 5- मिश्रातुएँ क्या हैं? लैन्थेनाइड धातुओं से युक्त एक प्रमुख मिश्रातु का उल्लेख करे । इसके उपयोग भी बताइए। 

उत्तर : मिश्रातु या मिश्रधातु (alloy) विभिन्न धातुओं का सम्मिश्रण होते हैं जो कि धातुओं के सम्मिश्रण से प्राप्त होते हैं। मिश्रातु समांगी ठोस विलयन हो सकते हैं जिनमें एक धातु के परमाणु, दूसरी धातु के परमाणुओं में अनियमित रूप से वितरित रहते हैं। इस प्रकार के मिश्रातुओं की रचनाएँ उन परमाणुओं द्वारा होती हैं जिनकी धात्विक त्रिज्याओं में 15% का अन्तर हो। एक सुप्रसिद्ध मिश्रातु मिश धातु (misch metal) है जो लगभग 50% सीरियम, 25% लैन्थेनम तथा सूक्ष्म मात्रा में नियोडियम, प्रेसियोडियम तथा अन्य तत्वों से मिलकर बनी होती है। मिश धातु की अत्यधिक मात्रा मैग्नीशियम आधारित मिश्रातु में प्रयुक्त होती है जो बन्दूक की गोली के कवच या खोल तथा हल्के फ्लिण्ट के उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है ।

प्रश्न 6- लैन्थेनाइड और ऐक्टिनाइड तत्वों के किन्हीं चार गुणों को लिखिए।

उत्तरः लैन्थेनाइडों के प्रमुख गुण- लैन्थेनाइडों के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-

(i) ये रंगीन आयन बनाने की प्रवृत्ति भी रखते हैं।

(ii) इनके गलनांक व क्वथनांक परमाणु क्रमांक के बढ़ने के साथ बढ़ते हैं।

(iii) ये चुम्बकीय गुण भी व्यक्त करते हैं।

(iv) ये संकुल यौगिक बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं।

ऐक्टिनाइडों के प्रमुख गुण-ऐक्टिनाइडों के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-

(i) ये चाँदी के समान सफेद धातुएँ होती हैं।

(ii) इनके गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं परन्तु संक्रमण तत्वों की अपेक्षा कम होते हैं।

(iii) इनकी विद्युत धनात्मकता उच्च होती है।

(iv) ये अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण अनुचुम्बकीय होते हैं।

प्रश्न7- संक्रमण तत्वों के निम्नलिखित गुणों की व्याख्या कीजिए- [ 5 marks important questions]

(i) धात्विक प्रकृति

(ii) अनुचुम्बकीय लक्षण।

(iii) गलनांक व क्वथनांक

(iv) आयनन ऊर्जा।

उत्तर – संक्रमण तत्वों के गुण

1) धात्विक प्रकृति-बाह्यतम कोश में केवल 1 या 2 इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण संक्रमण तत्व धात्विक गुण (अभिलक्षण) प्रदर्शित करते हैं अर्थात् ये कठोर, आघातवर्ध्य तथा तन्य होते हैं (मर्करी को छोड़कर, जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में होती है)।

2) गलनांक व क्वथनांक अपूर्ण -उपकोशों की उपस्थिति के कारण इनके मध्य सहसंयोजक बल कार्य करते हैं। अतः इनके मध्य धात्विक व सहसंयोजक दोनों प्रकार के बल कार्य करते हैं जो इनके परमाणुओं को आपस में मजबूती से बाँधे रखते हैं। यही कारण है कि इनके गलनांक व क्वथनांक -तथा-ब्लॉक के तत्वों की अपेक्षा उच्च होते है।

Mn में यद्यपि पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं, परन्तु फिर भी इसका गलनांक व क्वथनांक असामान्य रूप से कम होता है। इसका कारण इसकी जालक संरचना है जिसके कारण यह धात्विक व सहसंयोजक आबन्ध बनाने में असमर्थ रहता है।

3) अनुचुम्बकीय गुणधर्म- अधिकतर संक्रमण तत्वों में d-उपकोश आंशिक भरे होने के कारण ये अनुचुम्बकीय गुण प्रदर्शित करते हैं। यह गुण ताप के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा इसका मान बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र पर निर्भर नहीं होता है। अतः यह गुण इलेक्ट्रॉन के चक्रण के कारण व्यक्त होता है।

यदि किसी परमाणु/आयन में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हों तो इलेक्ट्रॉन युग्म के दोनों इलेक्ट्रॉनों के चक्रण चुम्बकीय आघूर्ण के मान समान परन्तु विपरीत दिशाओं में होंगे और ये एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे। अतः अनुचुम्बकत्व नहीं होगा। वे परमाणु/आयन जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं, अनुचुम्बकीय होते हैं जबकि समस्त युग्मित इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु/आयन प्रतिचुम्बकीय होते हैं।

4)आयनन ऊर्जा या विभव – किसी दी गई श्रेणी में संक्रमण तत्वों का आयनन विभव परमाणु क्रमांक के बढ़ने के साथ-साथ बढ़ता है, यद्यपि यह वृद्धि बहुत कम है। इसका कारण यह है कि जहाँ किसी श्रेणी में नाभिकीय आवेश बढ़ता है, वहाँ साथ-साथ d-उपकोश में आने वाले इलेक्ट्रॉन परिरक्षण प्रभाव उत्पन्न करते हैं जिससे धन आवेश के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश का प्रभाव कम हो जाता है। इन दोनों कारकों के कारण आयनन विभव का मान बहुत कम बढ़ता है।

क्रोमियम (3d 4s¹) तथा कॉपर (3d 10 4s¹) के द्वितीय आयनन विभव का मान अत्यधिक होता है। इसका कारण यह है कि स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है !

प्रश्न 8- (i) संक्रमण धातुओं की परमाणु त्रिज्याएँ किसी श्रेणी में किस प्रकार परिवर्तित होती हैं और क्यों?

(ii) धातु के संक्रमण आयन अनुचुंबकीय होते है ऐसा क्यों है ।

(iii) संक्रमण तत्व विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।

क्यों?

[2023 CD] 

उत्तर : (i) किसी भी संक्रमण श्रेणी में बायीं ओर से दायीं ओर जाने पर वर्ग-3 से वर्ग-7 तक तत्वों की परमाण्वीय त्रिज्या धीरे-धीरे कम होती जाती है। वर्ग-7 से वर्ग 10 तक के तत्वों की त्रिज्याएँ लगभग समान रहती हैं और इसके पश्चात् वर्ग-12 तक त्रिज्या का मान बढ़ता है। इसका कारण यह है कि संक्रमण श्रेणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ने के कारण नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है, जो परमाणु त्रिज्या को घटाने का प्रयास करती है जबकि आन्तरिक कोश के (n – 1) उपकोश में प्रवेश करने वाले इलेक्ट्रॉन, बाह्यतम कोश n * s ^ 2 के इलेक्ट्रॉनों को परिरक्षण प्रभाव के कारण प्रतिकर्षित करते हैं, फलस्वरूप परमाणु की त्रिज्या को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इस कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश (Z eff ) बहुत कम मात्रा में बढ़ता है जिसके कारण परमाण्वीय त्रिज्या में कमी, प्रतिनिधि तत्वों की तुलना में बहुत कम होती है।

(ii) अधिकतर संक्रमण तत्वों में (n – 1) कोश की d-उपकोश आंशिक भरे होने के कारण ये अनुचुम्बकीय गुण प्रदर्शित करते हैं। d-उपकोश के अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का चुम्बकीय आघूर्ण, प्रचक्रण कोणीय संवेग तथा कक्षीय कोणीय संवेग से सम्बन्धित होता है।

(iii) जिंक समूह में Zn व Cd को छोड़कर अन्य सभी संक्रमण तत्व विभिन्न या परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। इसका कारण यह है कि इन तत्वों की बाह्यतम कोश की 8-उपकोश तथा बाह्यतम कोश से पहली कोश की d-उपकोश की ऊर्जाओं में बहुत कम अन्तर होता है तथा दोनों उपकोशों के इलेक्ट्रॉन आबन्ध बनाने में प्रयुक्त किए जा सकते हैं। उदाहरणार्थ, आयरन (Fe) + 2 तथा +3 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ तथा कॉपर (Cu) + 1 तथा +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 9 – निम्नलिखित के सन्दर्भ में लैन्थेनाइड एवं ऐक्टिनाइड के रसायन की तुलना कीजिए-

(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

(ii) परमाण्वीय एवं आयनिक आकार

(iii) ऑक्सीकरण अवस्था [2018]

(iv) रासायनिक अभिक्रियाशीलता

उत्तर : (i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – लैन्थेनाइडों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Xe] 54 4f ^ (1 – 14) 5d ^ (0 – 1) * 6s ^ 2 होता है, जबकि ऐक्टिनाइडों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Rn] ^ 86 5f ^ (1 – 14) 6d ^ (1 – 2) * 7s ^ 2 होता है। अतः लैन्थेनाइड 4f श्रेणी से तथा ऐक्टिनाइड 5f श्रेणी से सम्बद्ध होते हैं।

(ii) परमाण्वीय एवं आयनिक आकार- लैन्थेनाइड तथा ऐक्टिनाइड दोनों +3 ऑक्सीकरण अवस्था में अपने परमाणुओं अथवा आयनों के आकारों में कमी प्रदर्शित करते हैं। लैन्थेनाइडों में यह कमी लैन्थेनाइड आकुंचन कहलाती है, जबकि ऐक्टिनाइडों में यह ऐक्टिनाइड आकुंचन कहलाती है। यद्यपि ऐक्टिनाइडों में एक तत्व से दूसरे तत्व तक 5f-इलेक्ट्रॉनों द्वारा अत्यन्त कम परिरक्षण प्रभाव के कारण आकुंचन उत्तरोत्तर बढ़ता है।

(iii) ऑक्सीकरण अवस्था- लैन्थेनाइड सीमित ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (2, 3, 4) प्रदर्शित करते हैं जिनमें +3 ऑक्सीकरण अवस्था सबसे अधिक सामान्य है। इसका कारण 4f, 5d तथा 6s उपकोशों के बीच अधिक ऊर्जा-अन्तर होना है। दूसरी ओर ऐक्टिनाइड अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं क्योंकि 5f, 6d तथा 7s उपकोशों में ऊर्जा-अन्तर कम होता है।

(iv) रासायनिक अभिक्रियाशीलता- लैन्थेनाइडों तथा ऐक्टिनाइडों की रासायनिक अभिक्रियाशीलता निम्नवत् होती है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु:- U.P बोर्ड परीक्षा में सफल होने के लिए अपने syllabus को अच्छी तरह से समझें और नियमित रूप से अभ्यास करते रहे साथ ही हर विषय पर ध्यान दे 

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