
UP Board Class 12 Biology 2026 Important Questions
प्रश्न 1. बहुभ्रूणता पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर : बहुभ्रूणता (Polyembryony) – ल्यूवेनहॉक (Leeuwen-hoek, 1796) ने सर्वप्रथम इसका अध्ययन किया था। सामान्यतः एक बीज मे एक भ्रूण मिलता है, परन्तु कुछ आवृतबीजियों तथा अनावृतबीजियों में बीज के अन्दर एक से अधिक भ्रूण का पाया जाना बहुभ्रूणता (polyembryony) कहलाती है।
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प्रश्न 2. अनिषेकजनित फल क्या हैं? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर : अनिषेकफलन सामान्यतः निषेचन (fertilization) के पश्चात् अण्डाशय (ovary) से फल बनता है। कभी-कभी बिना निषेचन के अण्डाशय फल में विकसित हो जाता है। ऐसा फल अनिषेक फल (parthenocarpic fruit) तथा फल बनने की यह क्रिया अनिषेकफलन (parthenocarpy) कहलाती है। प्रकृति में इनके अनेक उदाहरण देखे जा सकते हैं; जैसे- केला, पपीता, सन्तरा आदि। अनिषेक फलों में बीजाण्ड बीज में परिवर्द्धित नहीं हो पाते। अनेक पौधों में केवल परागण (pollination) होने पर ही फल बनने की क्रिया प्रारम्भ हो जाती है फिर चाहे निषेचन हो या न हो। कुछ हॉर्मोन्स (hormones); जैसे-NAA (Naphthalene Acetic Acid) के छिड़काव से अनिषेकफलन प्रेरित (induce) किया जा सकता है। चूँकि इस प्रकार बने फल बीज रहित होते हैं, अतः यह प्रक्रिया अनार व लीची जैसे फलों में हानिप्रद होती है, क्योंकि इनमें बीज के कुछ भाग ही खाए जाते है।
प्रश्न 3. अपरा की परिभाषा दीजिए। इसके प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर: अपरा (Placenta) – “गर्भ में स्थित धूण व मातृ ऊतकों के बीच का अस्थायी, आन्तरांग शारीरिक संरचनात्मक व कार्यिकीय (physical, structural and physiological) सम्बन्ध जो भ्रूण की जीवन सम्बन्धी मौलिक आवश्यकताओं को पूर्ति कर, उसके स्वास्थ्य की रक्षा करता है, तथा एक अन्तःस्रावी ग्रन्थि की भाँति भी कार्य करता है, अपरा (placenta) कहलाता है।”
शरीर की यह एकमात्र ऐसी संरचना है, जो दो प्राणियों के ऊतकों से मिलकर बनी होती है।
मनुष्य में तश्तरी के आकार का अपरा हीमोकोरियल अपरा
(haemochorial placenta) कहलाता है। इस अपरा में भ्रूण की कोरियोनिक विलाई (ट्रोफोब्लास्ट) सभी मातृ ऊतकों का पाचन कर लेती है और माँ के रक्त के सीधे सम्पर्क में रहती है।
अपरा के कार्य (1) अपरा विकसित होते भ्रूण को पोषण तथा ऑक्सीजन प्रदान करता है।
(2) अपरा उत्सर्जन में भी सहायक है। इसी के द्वारा उत्सर्जी पदार्थ भ्रूण के रुधिर से विसरण द्वारा माता के रुधिर में चले जाते हैं।
(3) अपरा चयनात्मक अवरोधक (selective barrier) की भाँति कार्य करता है। यह माता के रुधिर से लाभदायक पदार्थों; जैसे- पोषक पदार्थ, ऑक्सीजन, प्रतिरक्षी आदि को तो भ्रूण के रुधिर में प्रवेश करने देता है, किन्तु हानिकारक पदार्थों व जटिल प्लाज्मा प्रोटीन्स को भ्रूण में प्रवेश करने से रोकता है, लेकिन विषाणु आदि रोगजनक अपरा द्वारा भ्रूण में पहुँच जाते हैं।
(4) अपरा से स्रावित हॉमोंन्स गर्भावस्था को बनाए रखने तथा शिशु जन्म में सहायता करते हैं।
(5) चेचक, खसरा, डिप्थीरिया आदि के एण्टीबॉडीज को अपरा माता के रुधिर से भ्रूण में पहुँचाता है, जिससे इन रोगों से भ्रूण की सुरक्षा हो सके।
प्रश्न 4. परिवार नियोजन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : भारत में सन् 1951 में प्रारम्भ किए महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम परिवार नियोजन जिसका प्रमुख कार्य जनसंख्या नियन्त्रण था, का नाम बदलकर सन् 1977-78 में परिवार कल्याण (Family welfare) कर दिया गया। इसका नाम स्वयं इसके परिवार, समाज व राष्ट्र हित में होने की व्याख्या करता है। इस कार्यक्रम से जनसंख्या विस्फोट पर नियन्त्रण के प्रभावी उपाय किए गए हैं। जनसंख्या नियन्त्रण को देश की प्रगति में महती भूमिका है। जनसंख्या वृद्धि से खाद्य समस्या की आपूर्ति, शिक्षा व रोजगार की समस्या, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा समस्या, संसाधनों की कमी, आवास की समस्या आदि उत्पन्न होती हैं। परिवार कल्याण जैसे कार्यक्रम जनसंख्या पर नियन्त्रण कर इन समस्याओं की विकरालता को कम करते है साथ ही वह कार्यक्रम व्यक्ति को उच्च गुणवत्ता पूर्ण जीवन जीने के अवसर प्रदान कर समाज में उसके योगदान में परोक्ष रूप से वृद्धि करते हैं, अतः परिवार नियोजन राष्ट्र हित में है।
प्रश्न 5. जीनरूप तथा दृश्यरूप लक्षण पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर : दृश्यरूप या लक्षण प्ररूप या फीनोटाइप (Phenotype) – किसी लक्षण का भौतिक या बाह्य दृश्य रूप लक्षण प्ररूप कहलाता है; जैसे-लम्बा पौधा, बौना पौधा, बैंगनी पुष्प, सफेद पुष्प आदि।
यह समयुग्मजी या विषमयुग्मजी हो सकते हैं। किसी दिए जीनोटाइप के फोनोटाइप समय के साथ बदल सकते हैं। दो अलग-अलग जीनोटाइप का एक ही फीनोटाइप हो सकता है।
जीनरूप या जीन प्ररूप या जीनोटाइप (Genotype) – किसी लक्षण की जीनी अभिव्यक्ति को जीन प्ररूप कहते हैं। जैसे लाल पुष्प वाले पीधे का समयुग्मकी जीन प्ररूप RR जबकि विषमयुग्मकी जीन प्रारूप Rr होता है। लम्बे पौधे में यह, TT या Tt हो सकता है। किसी जीव का जीनोटाइप जीवनभर समान रहता है।
प्रश्न 6. D.N.A. फिंगर प्रिंटिंग का वर्णन कीजिए।
उत्तर : डी०एन०ए० फिंगरप्रिंटिंग तकनीक को सर्वप्रथम एलेक जेफ्रेज (Alec Jeffreys) ने विकसित किया था। इसकी सहायता से विभिन्न व्यक्तियों के मूल आनुवंशिक पदार्थ (D.N.A.) में भिन्नताओं को देखा जा सकता है।
डी०एन०ए० फिंगरप्रिंटिंग का सिद्धान्त- आनुवंशिक बहुरूपता जो व्यक्तियो में VNTR के रूप में प्रदर्शित होप्ती है, का विश्लेषण इस तकनीक का आधार है। VNTR जीनोम का वह स्थान है, जहाँ न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम एक के बाद एक क्रम में दोहराया जाता है। जीवधारी की प्रजाति के सभी सदस्यो के ये डी०एन०ए० प्रारूप भिन्न होते हैं। यही कारण है कि समरूपी जुड़वाँ (identical twins) को छोड़कर किसी भी व्यक्ति का फिंगरप्रिंट एक-दूसरे से मेल नहीं करता। डी०एन०ए० के कारण एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है। डी०एन०ए० के फिंगरप्रिंटिंग द्वारा डी०एन०ए० में स्थित उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्नता दर्शाते हैं। इस तकनीक के विभिन्न पद हैं- डी०एन०ए० का पृथक्करण, डी०एन०ए० को रेस्ट्रिक्शन एन्जाइम द्वारा खण्डों में बाँटना, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा डी०एन०ए० खण्डों को अलग-अलग करना, सदर्न ब्लोटिंग अर्थात् इन पृथक्कित खण्डों का नाइट्रोसेलुलोस झिल्ली पर स्थानान्तरण, खोजी प्रोब (अंकित VNTR) द्वारा संकरण, ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा संकरित भाग की पहचान, डी०एन०ए० फिंगर प्रिंट की उपयोगिता।
डी०एन०ए० फिंगरप्रिन्ट विभिन्न ऊतकों (खून, बाल पुटक, त्वचा, अस्थि, लार, शुक्राणु आदि) से प्राप्त किए जा सकते हैं। डी०एन०ए० फिंगरप्रिन्ट का उपयोग अपराध मामलों जैसे पीड़ित खूनी, बलात्कारी को पहचानने के लिए पितृत्व के झगड़ो में पारिवारिक सम्बन्धों को ज्ञात करने, विकास के अध्ययन आदि में किया जाता है।
प्रश्न 7. उत्परिवर्तन की परिभाषा दीजिए। उत्परिवर्तन सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया था?
उत्तर : उत्परिवरन
गुणसूत्रों का निर्माण न्यूक्लियोप्रोटीन्स से होता है। न्यूक्लियोप्रोटीन्स न्यूक्लिक अम्ल तथा प्रोटीन्स से बने होते हैं। डी०एन०ए० अणुओं के रासायनिक संयोजन में होने वाले परिवर्तनों को उत्परिवर्तन (mutation) कहते हैं। उत्परिवर्तन के फलस्वरूप डी०एन०ए० अणुओं में न्यूक्लियोटाइड्स क्षारक जोड़ियों के अनुक्रम बदल जाते हैं। डी०एन०ए० अणुओं की संरचना में भिन्नता के कारण विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होती हैं। उत्परिवर्तन सिद्धान्त ह्यूगो डी व्रीज (Hugo de Vries, 1901) ने प्रतिपादित किया था।
जीन उत्परिवर्तन, गुणसूत्र उत्परिवर्तन, गुणसूत्र समूह उत्परिवर्तन के कारण विभिन्नताएँ उत्पन्न होती है।
प्रश्न 8. टीकाकरण और टॉक्सॉइड्स में अन्तर कीजिए।
उत्तर : टीकाकरण (Vaccination) – किसी रोग के रोगाणुओं को प्रभावहीन बनाकर या मारकर या सम्बन्धित प्रतिजन को प्रभावहीन बनाकर टीका (vaccine) तैयार किया जाता है। टीके को शरीर में पहुंचा देने की प्रक्रिया को टीकाकरण कहते हैं। टायफॉइड, काली खाँसी, डिफ्थीरिया, क्षय रोग आदि रोगों में मृत जीवाणुओं का टीका लगाया जाता है। पोलियो, पीतज्वर, खसरा, चेचक आदि विषाणुजनित रोगों के लिए सम्बन्धित विषाणुओं को प्रभावहीन बनाकर टीका लगाया जाता है।
टॉक्सॉइड्स (Toxoids) – यह टीके का ही प्रकार है। टॉक्सॉइड्स रोगाणुओं से उपापचय द्वारा उत्पन्न आविष पदार्थों (toxins) का विष गुण (poisonous quality) समाप्त करके तैयार किए जाते हैं। जीवाणु द्वारा उत्पन्न प्रतिजन प्रोटीन्स को विभिन्न प्रोटीन्स को विभिन्न प्रकार से उपचारित करने पर आविषाणु प्रोटीन तो नष्ट हो जाती है, लेकिन इसकी प्रतिजनत्व (antigenic) विशिष्टता बनी रहती है। टॉक्सॉइड्स प्रतिरक्षी निर्माण को प्रेरित करते हैं और रोग उत्पन्न नहीं करते। टिटेनस, डिफ्थीरिया आदि रोगों से बचाव हेतु टॉक्सॉइड्स का टीकाकरणा किया जाता है।
प्रश्न 9. बायोगैस के उत्पादन में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : बायोगैस (Biogas) या गोबर गैस – यह कई गैसों का मिश्रण है। (CO2, H2S तथा CH₁) इसमें सबसे अधिक मात्रा मीथेन की होती है। यह अवायवीय जीवाणुओं द्वारा अवायवीय वातावरण में मेथेनोजन (Methanogens) जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न होती है मेथेनोबैक्टीरिया (Methanobacteria) इनमें से एक है। इसे गोबर गैस संयन्त्र में तैयार किया जाता है। इसके लिए गोबर की कर्दम (slurry of dung) का उपयोग करते है।
ग्रामीण क्षेत्रो में गोबर गैस का उपयोग ईंधन तथा प्रकाश उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। उपयोग की गई कर्दम का उपयोग जैव उर्वरक के रूप में कर लिया जाता है।
प्रश्न 10. Bt कपास पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : Bt कपास (Bt Cotton) – कपास में बैसीलस थ्यूरिनजिएन्सिस (Bacillus thuringiensis: Bt) जीवाणु की आविष प्रोटीन का संश्लेषण करने वाली जीन को जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा निवेशित करके इसकी कीट प्रतिरोधी किस्म विकसित की गई है। Bt किस्म का उपयोग करके प्रत्येक वर्ष करोड़ो रुपयों की फसल को कीटों से बचाया जाता है। इसके फलस्वरूप कपास के उत्पादन में 45-50% की वृद्धि हुई है। कीटनाशकों पर होने वाला व्यय तथा पर्यावरण प्रदूषण भी कम हुआ है। Bi कपास का यह पादप प्राकृतिक रूप से Bt टॉक्सिन (विषाक्त पदार्थ) का उत्पादन करता है जो कपास के पौधे में गाँठ उत्पन्न करने वाले कीटों को नष्ट कर देता है। इस विषाक्त पदार्थ के खाने से कीट मर जाता है, लेकिन Bt कपास सहित सभी Bt फसलों द्वारा मानव सहित अन्य जीवों व पर्यावरण पर पड़ने वाले दीर्घकालीन प्रभावो के बारे में अनेक वैज्ञानिकों ने चिन्ता व्यक्त की है।


