हिंदी महत्वपूर्ण प्रश्न 33 marks 10 मिनट में तैयार:-
1.बहुविकल्पी
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(क) सौ अजान एक सुजान’ के लेखक हैं-
(i) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(ii) प्रताप नारायण मिश्र
(iii) श्याम सुन्दर दास
(iv) बालकृष्ण भट्ट
उत्तर: (iv) बालकृष्ण भट्ट
(ख) ‘राष्ट्र का स्वरूप’ निबन्ध के लेखक हैं
(i) डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल
(ii) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(iii) पं. दीनदयाल उपाध्याय
(iv) डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी
उत्तर: (i) डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल
(ग) ध्रुवयात्रा’ कहानी के लेखक हैं-
(i) अमरकान्त
(ii) मुंशी प्रेम चन्द
(iii) यशपाल
(iv) जैनेन्द्र कुमार
उत्तर: (iv) जैनेन्द्र कुमार
(घ) ‘विद्यानिवास मित्र’ निबन्धकार हैं-
(ⅰ) ललित निबन्धों के
(ii) विचारात्मक निबन्धों के
(iii) मनोवैज्ञानिक निबन्धों के
(iv) भावनात्मक निबन्धों के
उत्तर: (ⅰ) ललित निबन्धों के
(ड़) ‘भाषा और आधुनिकता’ निबन्ध के लेखक हैं-
(i) वासुदेवशरण अग्रवाल
(ii) डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम
(iii) प्रो. जी सुन्दर रेड्डी
(iv) डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी
उत्तर: (iii) प्रो. जी सुन्दर रेड्डी
- (क) हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने वाले सर्वप्रथम विद्वान् है
(i) डॉ. गियर्सन
(ii) गार्सा द तासी
(iii) डॉ. रामकुमार वर्मा
(iv) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
उत्तर: (ii) गार्सा द तासी
(ख) मलिक मोहम्मद जायसी को किस धारा का कवि माना गया है?
(i) ज्ञानमार्गी अथवा सन्त काव्यधारा का
(ii) राममार्गी शाखा का
(iii) सूफी काव्यधारा का
(iv) सगुण-भक्ति धारा का
उत्तर: (iii) सूफी काव्यधारा का
(ग) ‘रीति काल’ को ‘श्रृंगार काल’ नाम दिया है-
(ⅰ) मिश्र बन्धुओं ने
(ii) रामशंकर शुक्ल ‘स्साल’ ने
(iii) विश्वनाथप्रसाद मिश्र ने
(iv) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
उत्तर: (iii) विश्वनाथप्रसाद मिश्र ने
(घ) ‘लहर’ के रचनाकार हैं-
(i) महादेवी वर्मा
(ii) जयशंकर प्रसाद
(iii) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
(iv) डॉ. रामकुमार वर्मा
उत्तर: (ii) जयशंकर प्रसाद
(ङ) ‘हिरोशिमा’ कविता के रचनाकार हैं-
(i) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ii) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(iii) महादेवी वर्मा
(iv) माखनलाल चतुर्वेदी
उत्तर: (ii) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
3.महत्वपूर्ण गद्यांश
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परम्परा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भुत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नये प्रयोगों की, नयी भाव-योजनाओं को व्यक्त करने के लिए नये शब्दों की खोज की महती आवश्यकता है।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) प्रस्तुत अवतरण के माध्यम से लेखक ने किस बात पर बल दिया है?
(iv) संस्कृति का एक अटूट अंग क्या है?
(v) किसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है?
उत्तर: (i) संदर्भ- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘गद्य-भाग’ में संकलित तथा श्रेष्ठ विचारक व निबन्धकार प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी द्वारा लिखित ‘भाषा और आधुनिकता’ शीर्षक निबन्ध से अवतरित है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या भाषा में जो प्रयोग प्राचीनकाल से चले आ रहे हैं, ये नये सांस्कृतिक परिवर्तनों को व्यक्त करने में समर्थ नहीं हैं। नित्यप्रति संस्कृति में हुए परिवर्तनों को भाषा द्वारा व्यक्त करने के लिए भाषा में नये-नये प्रयोगों, नये-नये शब्दों की खोज का कार्य होना बहुत आवश्यक है, जिससे बदलते हुए नये भावों को उचित रूप से व्यक्त किया जा सके।
(iii) प्रस्तुत गद्यावतरण में लेखक ने विज्ञान की प्रगति के कारण जो सांस्कृतिकं परिवर्तन होता है, उसे शब्दों द्वारा व्यक्त करने के लिए भाषा में नये प्रयोगों की आवश्यकता पर बल दिया है।
(iv) संस्कृति का एक अटूट अंग भाषा है।
(v) संस्कृति की गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है।
4.महत्वपूर्ण पद्यांश
मेरे प्यारे नवजलद से कंज से नेत्रवाले।
जाके आए न मधुबन से औ व भेजा संदेसा ।।
मैं रो-रो के प्रिय-विरह से बाबली हो रही हूँ।
जाके मेरी सब दुख-कथा श्याम को तू सुना दे।।
ज्यों ही मेरा भवन तज तू अलप आगे बढ़ेगी।
शोभावाली सुखद कितनी मंजु कुंजे मिलेंगी।।
प्यारी छाया मृदुल स्वर से मोह लेंगी तुझे थे।
तो भी मेरा दुःख लख यहाँ जा न विश्राम लेना।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) पवन-दूतिका द्वारा किसने किसको संदेश भेजा है?
(iv) प्रस्तुत पद्यांश में श्रीकृष्ण के सौन्दर्य का वर्णन किस प्रकार किया है?
(v) राधा की मनोदशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर: (i) संदर्भ- प्रस्तुत पांश महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘ प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘पद्य-भाग’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से अवतरित है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या- राधिका पवन दूतिका से अपनी विरह-व्यथा का वर्णन करते हुए कहती है कि नए मेघों जैसी शोभा से युक्त और कमल के समान नेत्र वाले मेरे प्रिय श्रीकृष्ण मथुरा चले गए हैं और अभी तक वापस नहीं आए हैं। न ही उन्होंने वहाँ से मेरे लिए कोई संदेश भेजा है।




