गद्य और पद्य के महत्वपूर्ण साहित्य परिचय
गद्य
1- वासुदेव शरण अग्रवाल
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जीवन परिचयः – डॉक्टर वासुदेव शरण अग्रवाल का जन्म सन 1904 ईस्वी में मेरठ जिले के खेड़ा नामक गांव में हुआ था। उनके माता-पिता लखनऊ में रहते थे। अतः इनका बचपन लखनऊ में ही बीता। इन्होंने काशी विश्वविद्यालय से बीए. और लखनऊ विश्वविद्यालय से एम. ए. और पी. एचडी की उपाधि प्राप्त की। इन्होंने पालि, संस्कृत, अंग्रेजी आदि भाषाओं का गहन अध्ययन किया। हिंदी साहित्य की सेवा में लीन यह महान व्यक्ति 27 जुलाई सन 1967 ईस्वी में भारत माता के चरणों में हमेशा के लिए सो गया।
साहित्यिक परिचयः- डॉक्टर वासुदेव शरण अग्रवाल ने कविता लेखन से अपना साहित्य प्रारंभ किया। यह लखनऊ एवं मथुरा के ‘पुरातत्व संग्रहालय’ में निरीक्षक, केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संचालक, और राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली के अध्यक्ष रहे। इन्होंने साहित्य जीवन में साहित्य के साथ-साथ पुरातत्व को भी अपन अध्ययन का विषय बनाया। इनकी भाषा शुद्ध खड़ी बोली है। इन्होंने अपनी भाषा में अनेक देशज शब्दों का भी प्रयोग किया है। यह केवल एक गद्य लेखक ही नहीं बल्कि काव्य प्रेमी भी थे।
रचनाएं:- डॉक्टर वासुदेव शरण अग्रवाल जी ने निबंध संग्रह शोध तथा संपादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी रचनाएं निम्नलिखित है
निबंधसंग्रहः- कल्पवृक्ष, कल्पलता, पृथ्वीपुत्र, वागधरा, वेद विद्या आदि।
शोध ग्रंथः – पाणिनि कालीन भारत।
संपादन:- पद्मावत, हर्षचरित
2- हजारी प्रसाद द्विवेदी
जीवन परिचयः- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन 1907 ईस्वी में बलिया जिले के दुबे का छपरा ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री अनमोल द्विवेदी तथा माता का नाम ज्योतिषमती देवी था। इन्होंने हिंदी एवं संस्कृत भाषाओं का गहन अध्ययन किया। सन 1930 ईस्वी में काशी विश्वविद्यालय से ज्योतिषाचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की। सन 1957 ईस्वी में भारत सरकार ने इन्हें पद्म भूषण की उपाधि से विभूषित किया। सन 1979 ईस्वी में रोग से पीड़ित होने के कारण यह महान साहित्यकार चिर निद्रा में हमेशा के लिए सो गया।
साहित्य परिचयः-आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी साहित्य के
प्रख्यात निबंधकार, आलोचक, संपादक, उपन्यासकार के अतिरिक्त एक कुशल वक्ता एवं एक सफल अध्यापक र्भः थे। उनकी रचनाओं में नवीनता एवं प्राचीनता दोनों का 3.28 समन्वय था। आधुनिक युग के गद्यकारों में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का महत्वपूर्ण स्थान है। उनके विषय विवेचन में गंभीरता और शालीनता स्पष्ट रूप से प्रकट होती है।
प्रमुख रचनाएं :- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के द्वारा लिखित प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं
निबंध संग्रह- अशोक के फूल, कुटज, कल्पलता, आलो पर्व।
उपन्यास- बाणभट्ट की आत्मकथा, पुनर्नवा। आलोचना साहित्य साहित्य सहचर, और सूर साहित्य, कबीर।
पद्य
1- अयोध्या सिंह उपाध्याय (हरिऔध)
जीवन परिचय :- अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी का
जन्म सन 1865 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निजामाबाद नामक स्थान पर हुआ था। घर पर ही रहकर इन्होंने हिंदी, संस्कृत, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी व साहित्य का अध्ययन किया। इन्होंने कई वर्षों तक कानूनगो के पद पर कार्य किया । इसके बाद इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अवैतनिक प्रधानाध्यापक के रूप में सेवा दी। उनकी रचना प्रियप्रवास पर इन्हें मंगला प्रसाद पारितोषिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1947 में इनका देहान्त हो गया।
साहित्यिक परिचय :- द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि और
लेखक अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध खड़ी बोली को काव्य भाषा में स्थापित करने वाले प्रमुख कवियों में से एक हैं। उनकी कृति प्रिय प्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। इन्होंने हिंदी के तीनों युगों भालों युग, द्विवेदी युग तथा छायावादी युग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रचनाएं :- प्रियप्रवास, पारिजात, वैदेही वनवास, प्रेमकांता अधखिला फूल, ठेठ हिंदी का ठाठ, रुक्मणी परिणय।
2- जयशंकर प्रसाद
जीवन परिचयः- जयशंकर प्रसाद जी का जन्म काशी कएक वैश्य परिवार में सन 1889 ईस्वी में हुआ था। इनके पिता का नाम देवी प्रसाद था। इनके बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने के बाद इनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी। घर पर ही इन्होंने हिंदी, संस्कृत, उर्दू, फारसी आदि भाषाओं का गहन अध्ययन किया। इनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। क्षय रोग से पीड़ित होने के कारण सन 1937 ईस्वी में अल्पायु में ही इस महान साहित्यकार का स्वर्गवास हो गया।
साहित्यिक परिचयः- जयशंकर प्रसाद जी छायावाद के
प्रवर्तक थे। इन्होंने अपनी रचनाओं में हिंदी को समृद्ध किया। जयशंकर प्रसाद जी एक कवि ही नहीं बल्कि नाटककार, उपन्यासकार, कहानीकार तथा निबंधकार भी थे। उनके काव्य में प्रेम और सौंदर्य का चित्रण होता है। यह अनेक विषयों तथा भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे।
रचनाएं:- आंसू, लहर, झरना, कामायनी, आंधी, इंद्रजाल आकाशदीप, एक घंट, कामना, कंकाल, तितली, इरावती।




