Class 12 Physics Chapter 5 Most Important Questions Answers
महत्त्वपूर्ण परिभाषाएं –
▶ चुम्बकन तीव्रता – किसी पदार्थ के प्रति एकांक आयतन में उत्पन्न परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण को उस पदार्थ के चुम्बकन की तीव्रता कहते हैं। इसे ‘I’ से प्रदर्शित करते हैं।
इसका मात्रक ‘ऐम्पियर मीटर’ है।
▶ चुम्बकीय तीव्रता – वह बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र जो उसमें रखे गए पदार्थ को चुम्बकित करने की क्षमता रखता है, चुम्बकीय तीव्रता कहलाता है। इसे ‘H’ से प्रदर्शित करते हैं।
जहाँ B पदार्थ के भीतर चुम्बकीय प्रेरण, I पदार्थ की चुम्बकन तीव्रता तथा u⁰ निर्वात की चुम्बकशीलता है।
▶पदार्थों को उनके चुम्बकीय गुणों के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है-
(i) प्रतिचुम्बकीय पदार्थ, (ii) अनुचुम्बकीय पदार्थ, (iii) लौहचुम्बकीय पदार्थ।
ऐसे पदार्थ जो तीव्र प्रबलता के चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्षेत्र के विपरीत दिशा में आंशिक रूप से चुम्बकित होते हैं प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। जैसे-सोना, चाँदी, हीरा, नमक, जल, वायु आदि।
▶ऐसे पदार्थ जो प्रबल तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की दिशा में आंशिक रूप से चुम्बकित होते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। जैसे-ऐलुमिनियम, प्लैटिनम, सोडियम, कॉपर क्लोराइड, ऑक्सीजन आदि।
▶ ऐसे पदार्थ जो कम तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की दिशा में प्रबल चुम्बकित हो जाते हैं, लौहचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। जैसे-लोहा, निकिल, कोबाल्ट आदि।
— परीक्षा के दृष्टिकोण से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न —-
प्रश्न 1- तीन लौहचुम्बकीय पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर: लोहा, निकिल और कोबाल्ट।
प्रश्न 2- प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप पर किस प्रकार निर्भर करती है?
उत्तर : प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति ताप पर निर्भर नहीं करती है।
प्रश्न 3- इलेक्ट्रॉन चक्रण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : जब इलेक्ट्रॉन कक्षीय परिक्रमण के अतिरिक्त अपनी धुरी पर घूमता है तो इसे इलेक्ट्रॉन चक्रण कहते हैं।
. प्रश्न 4- किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर प्रतिचुम्बकीय पदार्थ का व्यवहार अनुचुम्बकीय पदार्थ से किस प्रकार भिन्न होता है?
उत्तर : जब किसी प्रतिचुम्बकीय पदार्थ को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखते है तो वे प्रतिकर्षित होते हैं जबकि अनुचुम्बकीय पदार्थ आकर्षित होते हैं।
प्रश्न 5. किन्हीं तीन अनुचुम्बकीय पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर : ऐलुमिनियम (Al), सोडियम (Na), क्रोमियम (Cr)।
प्रश्न 6- अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के परमाणुओं में क्या अन्तर है?
उत्तर : अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के परमाणुओं में अन्तर
(i) अनुचुम्बकीय पदार्थ के परमाणु में स्थायी चुम्बकीय आघूर्ण होता है जबकि प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के परमाणु में चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है।
(ii) अनुचुम्बकीय पदार्थों का ताप बदलने से इनके परमाणुओं का चुम्बकत्व बदल जाता है, जबकि प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का ताप बदलने से इनके परमाणुओं का चुम्बकत्व नहीं बदलता है।
प्रश्न 7- चुम्बकत्व का परमाण्वीय मॉडल क्या है? ( Important )
उत्तर : चुम्बकत्व का परमाण्वीय मॉडल- पदार्थ का प्रत्येक परमाणु एक छोटा-सा चुम्बक है। परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के कक्षीय परिक्रमण तथा चक्रण के कारण परमाणु में चुम्बकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है। चुम्बकत्व के परमाण्वीय मॉडल में इलेक्ट्रॉन के कक्षीय परिक्रमण तथा चक्रण को चुम्बकत्व का मूल कारण माना गया है तथा इसी आधार पर विभिन्न पदार्थों के चुम्बकत्व की व्याख्या की जाती है। किसी परमाणु के चुम्बकत्व में इलेक्ट्रॉनों के परिक्रमण की तुलना में चक्रण का योगदान अधिक माना जाता है।
प्रश्न 8-. कुछ पदार्थों के परमाणुओं में चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है। इसे परमाण्वीय मॉडल के आधार पर समझाइए।
उत्तर: जिन पदार्थ के परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या सम होती है तथा दो-दो इलेक्ट्रॉन मिलकर युग्म बना लेते हैं, उनमें चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है क्योंकि प्रत्येक युग्म में एक इलेक्ट्रॉन का चक्रण दूसरे इलेक्ट्रॉन के चक्रण के विपरीत दिशा में होता है, अतः युग्म के इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे के चुम्बकीय आघूर्णो को पूर्णतः निरस्त कर देते हैं।
प्रश्न 9- चुम्बकत्व के परमाण्वीय मॉडल के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि किसी धारावाही परिनालिका की अक्ष पर उसके भीतर रखी हुई नर्म लोहे की छड़ चुम्बकित क्यों हो जाती है?
उत्तर: नर्म लोहे की छड़ का प्रत्येक परमाणु एक चुम्बक होता है। ये परमाण्वीय चुम्बक पदार्थ के भीतर डोमेनों की रचना करते हैं। जब नर्म लोहे की छड़ को धारावाही परिनालिका के अन्दर रखते हैं तो उसके अन्दर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के कारण इन डोमेनों की चुम्बकीय अक्षे, चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित हो जाती है। इस प्रकार नर्म लोहे की छड़ चुम्बकित हो जाती है।
प्रश्न 10-डोमेन सिद्धान्त से लौहचुम्बकत्व की व्याख्या कीजिए। अथवा
चुम्बकत्व के परमाण्वीय मॉडल के आधार पर अनुचुम्बकत्व की व्याख्या कीजिए।
[ 8 marks important]
उत्तर : (i) अनुचुम्बकत्व की व्याख्या- (a) उत्पत्ति का कारण-
अनुचुम्बकत्व का गुण उन पदार्थों में पाया जाता है, जिनके परमाणुओं अथवा अणुओं में कुछ ऐसे इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिनका चक्रण केवल एक ही दिशा में होता है, अतः इनके परमाणुओं में स्थायी चुम्बकीय आघूर्ण होता है और वह एक सूक्ष्म दण्ड चुम्बक की भांति व्यवहार करता है, इसे ‘परमाण्वीय चुम्बक’ कहते हैं। सामान्य अवस्था में सभी परमाण्वीय चुम्बक अनियमित रूप से अभिविन्यसित रहते हैं जिससे पूरे पदार्थ का परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य ही रहता है।
(b) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र का प्रभाव- इन पदार्थों को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर प्रत्येक परमाण्वीय चुम्बक पर एक बल-आघूर्ण कार्य करता है, जो सभी परमाण्वीय चुम्बकों को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयास करता है। जब पदार्थ के सभी परमाण्वीय चुम्बक, क्षेत्र की दिशा में संरेखित हो जाते हैं तो सम्पूर्ण पदार्थ चुम्बकीय आघूर्ण प्राप्त कर लेता है अर्थात् पदार्थ बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में चुम्बकित हो जाता है।
(ii) प्रतिचुम्बकत्व की व्याख्या- (a) उत्पत्ति का कारण- प्रतिचुम्बकत्व का गुण उन पदार्थों में पाया जाता है, जिनके अणुओं अथवा परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनो की संख्या सम होती है तथा दो-दो इलेक्ट्रॉन मिलकर ऐसे युग्म (pair) बना लेते हैं जिसमें एक इलेक्ट्रॉन का चक्रण दूसरे इलेक्ट्रॉन के चक्रण की विपरीत दिशा में होता है, अतः युग्म के इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे के चुम्बकीय आघूर्ण को निरस्त कर देते हैं। इस प्रकार प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के परमाणुओं का परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है।
(b) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र का प्रभाव- जब प्रतिचुम्बकीय पदार्थों को किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो चुम्बकीय क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन युग्म के एक इलेक्ट्रॉन का वेग बढ़ जाता है, जबकि दूसरे इलेक्ट्रॉन का वेग कम हो जाता है। अब इलेक्ट्रॉन युग्म के इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे के चुम्बकीय आघूर्ण को निरस्त नहीं कर पाते अर्थात् परमाणु में चुम्बकीय आघूर्ण प्रेरित हो जाता है, जिसकी दिशा की विपरीत दिशा में चुम्बकित हो जाता है। ताप के बदलने पर इन पदार्थों के बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के विपरीत होती है, अतः पदार्थ वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र प्रतिचुम्बकत्व गुण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
(iii) लौहचुम्बकत्व की व्याख्या (डोमेन सिद्धान्त)- (a) उत्पत्ति का कारण-लौहचुम्बकीय पदार्थों का भी प्रत्येक परमाणु एक चुम्बक होता है. परमाणुओं में कुछ ऐसी जटिल अन्योन्य क्रियाएँ होती हैं, जिनके कारण पदार्थ के जिसमें कुछ स्थायी चुम्बकीय आघूर्ण होता है, परन्तु लौहचुम्बकीय पदार्थों के भीतर परमाणुओं के असंख्य, अतिसूक्ष्म आकार के प्रभावी क्षेत्र बन जाते हैं। इन्हें डोमेन (domains) कहते हैं। डोमेन बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में अनियमित ढंग से इस प्रकार विन्यसित रहते हैं कि उनका परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है।
(b) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र का प्रभाव-जब लौहचुम्बकीय पदार्थों को आघूर्ण शून्य नहीं रहता है, बल्कि परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण निम्नलिखित प्रकार से बढ़ सकता है-
डोमेनों की परिसीमाओं के विस्थापन द्वारा – इस सिद्धान्त के अनुसार जो डोमेन बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के अनुकूल अभिविन्यस्त होते हैं, वे आकार में बढ़ जाते हैं। इसके विपरीत, जो डोमेन बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के प्रतिकूल अभिविन्यस्त होते हैं, वे आकार में छोटे हो जाते हैं।
डोमेनों के घूर्णन द्वारा – इस सिद्धान्त के अनुसार पदार्थ को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर डोमेन इस प्रकार घूमने लगते हैं कि सभी डोमेनों के चुम्बकीय आघूर्ण की दिशाएँ लगभग बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र मे हो जाती हैं। जब बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र प्रबल होता है तो लौह चुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकन प्रायः डोमेनों के घूर्णन के द्वारा होता है।
—--EXAM Tips FOR STUDENTS ——-
1- यूपी बोर्ड परीक्षा में सफलता के लिए सिलेबस को अच्छी तरह समझे और नियमित अभ्यास करें ।
2- पढ़ाई कि योजना बनाए जिसमे हर विषय के लिए समय हो समझो टॉपिक पर ज्यादा फॉक्स करे।
3- पेपर में पहले आसान सवाल हल करें सभी प्रश्नों के उत्तर दें बिन कोई छोड़ें।
4- परीक्षा में व्हाइटनर(whitener) का उपयोग न करें केवल काला(black), नीला (blue) पेन का उपयोग करें ।
