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Class 12 Biology Chapter 5 Most Important Questions and Answers | वंशगति का आण्विक आधार महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

Class 12 Biology Chapter 5 Most Important Questions and Answers

प्रश्न 1. सेण्ट्रल डोग्मा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर : D.N.A. खण्ड पर उपस्थित आनुवंशिक सूचनाएँ m -R.N.A. के माध्यम से प्रोटीन के रूप में अभिव्यक्त होती है। सूचनाओं के इसी एकदिशीय प्रवाह को अणु जैविकी का केन्द्रीय सिद्धान्त (central dogma of molecular biology) कहते हैं। इसे फ्रांसिस क्रिक ने प्रस्तुत किया था।

रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एन्जाइम की खोज के बाद यह केन्द्रीय सिद्धान्त कुछ परिवर्तित हुआ है। इसे अब निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जाता है

प्रश्न 2. प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक डी०एन०ए० में दो अन्तर लिखिए।

उत्तर : (1) प्रोकैरियोटिक डी०एन०ए० में हिस्टोन प्रोटीन नहीं होती है तथा (2) इसका अणु वृत्ताकार (circular) होता है।

(1) यूकैरियोटिक डी०एन०ए० में हिस्टोन प्रोटीन होती है तथा (2) इसका अणु रैखिक (linear) होता है।

प्रश्न 3. आर०एन०ए० एवं डी०एन०ए० की शर्करा में क्या अन्तर होता है?

उत्तर: R.N.A. में राइबोस (ribose) तथा D.N.A. में डिऑक्सीराइबोस (deoxyribose) शर्करा पायी जाती है। डिऑक्सीराइबोस शर्करा में 2 कार्बन परमाणु पर एक ऑक्सीजन परमाणु कम होता है

प्रश्न 4. ओपेरॉन किसे कहते हैं? [ Important]

उत्तर : आनुवंशिकी में डी०एन०ए० की एक क्रियात्मक इकाई, जिसमें एक प्रमोटर व उसके अधीन कार्य करने वाली कुछ जीनो का समूह सम्मिलित होता है, ओपेरॉन मॉडल कहलाता है। यह जीन एक साथ m-R.N.A. के रूप में अनुलेखित हो जाती है। प्रोकैरियोट हेतु जैकब व मोनॉड ने ओपेरॉन मॉडल की परिकल्पना प्रस्तुत की। एक ओपेरॉन में एक ओपरेटर, प्रमोटर, रेगुलेटर तथा संरचनात्मक जीन शामिल होती है। प्रत्येक ओपेरॉन का विशिष्ट ओपरेटर व विशिष्ट संदमक (repressor) होता है। ओपरेटर क्षेत्र प्रमोटर के निकट स्थित होता है।

प्रश्न 5.डी०एन०ए० में पायी जाने वाली चार न्यूक्लियोटाइड इकाइयों के नाम लिखिए।

उत्तर : D.N.A. में चार प्रकार की न्यूक्लियोटाइड इकाइयाँ होती है-

(1) डिऑक्सीएडीनाइलिक अम्ल,

(2) डिऑक्सीगुएनाइलिक अम्ल,

(3) डिऑक्सीसाइटिडाइलिक अम्ल तथा

(4) डिऑक्सीथाइमिडाइलिक अम्ल 

प्रश्न 6. D.N.A. को केन्द्रक में मिलने वाले अम्लीय पदार्थ के रूप में सर्वप्रथम किसने पहचान किया?

उत्तर : फ्रेड्रिक मीशर (Friedrick Miescher, 1869) ने केन्द्रक से प्राप्त अम्लीय पदार्थ को न्यूक्लिन (nuclein) नाम दिया। अम्लीय प्रकृति के आधार पर अल्टमान (Altmann, 1889) ने इसे न्यूक्लिक अम्ल कहा।

प्रश्न 7. उन्नायक (प्रमोटर) को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: उन्नायक या वर्धक (promoter) जीन ओपेरॉन प्रतिरूप में प्रचालक (operator) जीन के समीप बायीं ओर स्थित जीन है, जिस पर दूत R.N.A. का अनुलेखन प्रारम्भ होता है। R.N.A. पॉलिमरेज एन्जाइम इसी स्थान से जुड़कर अनुलेखन प्रारम्भ करता है। यही जीन दमनक (repressor) से जुड़कर R.NA पॉलिमरेज का मार्ग अवरुद्ध करता है।

प्रश्न 8. जेनेटिक कोड क्या है? यह किस प्रकार कार्य करता है।

उत्तर : आनुवंशिक कोड जीवन के प्रारम्भिक समय से चली आ रही वह सार्वत्रिक कोडित सूचना है, जो सभी जीवो में आनुवंशिक सूचना के आधार पर प्रोटीन संश्लेषण को विशिष्टीकृत रूप देता है। इस आनुवंशिक भाषा में प्रत्येक संकेतांक या कोडवर्ड तीन अक्षरों का बना त्रिकूट (triplet codon) होता है, जो m-RNA के न्यूक्लियोटाइडों के प्रतीकों (AUGC) को दर्शाता है तथा किसी एक ऐमीनो अम्ल को कूटित (code) करता है।

m-RNA अणु पर उपस्थित तीन क्षारकों का एक समूह जो एक ऐमीनो अम्ल को पहचानता है, आनुवंशिक कोड कहलाता है। D.N.A. तथा R.N.A. में उपस्थित सूचनाओं का पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के रूप में प्रकटन एक जटिल व रोचक प्रक्रिया है। क्रिक ने बताया कि तीन क्षारकों का क्रम एक ऐमीनो अम्ल को कोड करता है। एक विशेष आनुवंशिक कोड हमेशा एक निश्चित ऐमीनो अम्ल को ही कोड करता है यह दो या अधिक ऐमीनो अम्ल को कोडित नहीं करेगा

प्रश्न 9. न्यूक्लियोसोम का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर : न्यूक्लियोसोम (Nucleosome) – अत्यधिक लम्बे D.N.A. अणु को कोशिका के केन्द्रक में समेटे रखने के लिए यूकैरियोटिक कोशिका में धनात्मक प्रोटीन हिस्टोन पैकिंग का कार्य कर विशिष्ट संरचना न्यूक्लियोसोम बनाती है। यह प्रोटीन लाइसिन व आर्जिनीन समूह होते हैं। इसमें क्षारकीय प्रोटीन्स के अणुओं से बना प्रोटीन क्रोड कण (core particle) हिस्टोन अष्टक होता है। इसमें H2A, H2B प्रोटीन, H3 व H4 प्रोटीन के दो-दो अणु होते है जो क्रोड कण का मध्य भाग बनाते हैं।

प्रश्न 10. D.N.A. फिंगर प्रिंटिंग का वर्णन कीजिए।

उत्तर : डी०एन०ए० फिंगरप्रिंटिंग तकनीक को सर्वप्रथम एलेक जेफ्रेज (Alec Jeffreys) ने विकसित किया था। इसकी सहायता से विभिन्न व्यक्तियों के मूल आनुवंशिक पदार्थ (D.N.A.) में भिन्नताओं को देखा जा सकता है।

डी०एन०ए० फिंगरप्रिंटिंग का सिद्धान्त- आनुवंशिक बहुरूपता जो व्यक्तियों में VNTR के रूप में प्रदर्शित होप्ती है, का विश्लेषण इस तकनीक का आधार है। VNTR जीनोम का वह स्थान है, जहाँ न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम एक के बाद एक क्रम में दोहराया जाता है। जीवधारी की प्रजाति के सभी सदस्यों के ये डी०एन०ए० प्रारूप भिन्न होते हैं। यही कारण है कि समरूपी जुड़वाँ (identical twins) को छोड़कर किसी भी व्यक्ति का फिंगरप्रिंट एक-दूसरे से मेल नहीं करता। डी०एन०ए० के कारण एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है। डी०एन०ए० के फिंगरप्रिंटिंग द्वारा डी०एन०ए० में स्थित उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्नता दर्शाते हैं। इस तकनीक के विभिन्न पद हैं- डी०एन०ए० का पृथक्करण, डी०एन०ए० को रेस्ट्रिक्शन एन्जाइम द्वारा खण्डों में बाँटना, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा डी०एन०ए० खण्डों को अलग-अलग करना, सदनं ब्लोटिंग अर्थात् इन पृथक्कित खण्डों का नाइट्रोसेलुलोस झिल्ली पर स्थानान्तरण, खोजी प्रोब (अंकित VNTR) द्वारा संकरण, ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा संकरित भाग की पहचान, डी०एन०ए० फिंगर प्रिंट की उपयोगिता।

डी०एन०ए० फिंगरप्रिन्ट विभिन्न ऊतकों (खून, बाल पुटक, त्वचा, अस्थि, लार, शुक्राणु आदि) से प्राप्त किए जा सकते हैं। डी०एन०ए० फिंगरप्रिन्ट का उपयोग अपराध मामलों जैसे पीड़ित खूनी, बलात्कारी को पहचानने के लिए, पितृत्व के झगड़ों में पारिवारिक सम्बन्धों को ज्ञात करने, विकास के अध्ययन आदि में किया जाता है।

प्रश्न 11. मानव जीनोम परियोजना’ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर : मानव जीनोम प्रोजेक्ट – यह यू०एस० डिपार्टमेण्ट ऑफ एनर्जी व नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ हैल्थ द्वारा प्रायोजित एक अन्तर्राष्ट्रीय परियोजना थी। इसमे अनेक देशों के वैज्ञानिकों ने मिलकर कार्य किया।

यह एक दीर्घावधि परियोजना थी। यह सन् 1990 में प्रारम्भ हुई व 2003 में पूरी हुई।

इस कार्य को अगर पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया जाए तो इसके लिए

एक-एक हजार पृष्ठ वाली 3300 पुस्तकों की आवश्यकता होगी जिसके हर पेज पर 1000 अक्षर (क्षारक युग्म) हों।

इससे प्राप्त विशाल आँकड़ों के संग्रह, पुनर्प्राप्ति (recovery) व विश्लेषण हेतु हाई स्पीड कम्प्यूटरों की आवश्यकता पड़ी। इन्हीं कारणों से मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना कहा गया।

मानव जीनोम परियोजना के लक्ष्य निम्नलिखित है-

(1) मानव जीन्स की पहचान करना।

(2) मानव डी०एन०ए० को बनाने वाले लगभग 3 बिलियन रासायनिक क्षारक युग्मों के अनुक्रमों को निर्धारित करना।

(3) जीनोम सम्बन्धी आँकड़ों को संगृहीत करना और विश्लेषण हेतु आधुनिकतम तीव्र, अधिक प्रभावी तकनीक विकसित करना।

(4) योजना के फलस्वरूप उठने वाली सामाजिक (social), नैतिक (ethical) एवं कानूनी समस्याओं (legal issues) पर विचार करना।

मानव जीनोम में प्रयुक्त विधियाँ

इस परियोजना को पूरा करने में दो प्रमुख विधियों का प्रयोग किया गया-

(1) अभिव्यक्त अनुक्रम टैग्स (Expressed Sequence Tags) (2) अनुक्रम टिप्पण या सीक्वेन्स एनोटेशन (Sequence Annotation)।

मानव जीनोम परियोजना की उपलब्धियाँ या विशेषताएँ

मानव जीनोम परियोजना से प्राप्त मुख्य उपलब्धियाँ निम्नवत् है-

(1) मानव जीनोम में 3164.7 करोड़ क्षारक मिलते हैं।

(2) प्रत्येक जीन में औसतन 3000 क्षारक होते हैं, इनके आकार में विभिन्नताएँ पायी जाती हैं।

(3) मनुष्य की ज्ञात सबसे बड़ी जीन डिसट्रॉफिन (dystrophin) में 2.4 करोड़ क्षारक पाए जाते हैं।

(4) जीन की संख्या लगभग 30,000 से 31,000 है। लगभग 99.9% व्यक्तियों के न्यूक्लियोटाइड्स समान होते हैं।

(5) ज्ञात जीन्स में से लगभग 50% के कार्यों की जानकारी प्राप्त हो गई है।

मानव जीनोम का महत्त्व

मानव जीनोम परियोजना से जीनोमिक्स या जीनोम विज्ञान एक उपयोगी विधा के रूप में स्थापित हुआ है। इससे सबसे अधिक लाभ निःसन्देह जीन चिकित्सा के क्षेत्र में होगा। अभी तक हुए शोध कार्य से छह हजार से अधिक आनुवंशिक विकारों का पता लगाया जा चुका है। जीनोम विज्ञान के कारण जन्म के तुरन्त पश्चात् शिशु की जीनोम संरचना का पता लगाकर इसके आनुवंशिक विकारों को बचपन में ही दूर करना सम्भव हो जाएगा।

इसके लिए डी०एन०ए० टीका बनाने के लिए शोध कार्य प्रारम्भ हो चुके हैं। कैंसर, एड्स (AIDS) जैसे रोगों के उपचार हेतु व्यक्ति विशेष की आनुवंशिक संरचना के अनुसार औषधियाँ तैयार हो सकेंगी।

प्रश्न 12. आनुवंशिक कूट पर निबंध लिखिए।

[ 5 marks important questions]

उत्तर : आनुवंशिक कूट

आनुवंशिक कोड जीवन के प्रारम्भ से चला आ रहा है। वह सार्वत्रिक (universal) कोड है, जो सभी जीनो में आनुवंशिक सूचना के आधार पर प्रोटीन संश्लेषण को विशिष्टीकृत रूप देता है। इस आनुवंशिक भाषा में प्रत्येक संकेतांक या कोड वर्ड तीन अक्षरों का बना होता है, जो m-R.N.A. के न्यूक्लियोटाइडों के प्रतीक (AUGC) है तथा यह 20 ऐमीनो अम्लों में से एक को कोडित करता है। जेनेटिक कोड की भाषा को समझना एक जटिल कार्य था। इसमे भौतिक कर विज्ञानियो, कार्बनिक रसायनशास्त्रियों, जैव रसायनविदों व आनुवंशिकी वैज्ञानिको कने सहयोग किया। जॉर्ज गैमो ने पहली बार बताया कि एक संकेताक्षर या कोड तीन अक्षरों से बना होना चाहिए (20 ऐमीनो अम्ल व 4 क्षारक के लिए 43 (4 × 4 × 4) = 64 कोडॉन होने चाहिए। बाद में हरगोविन्द खुराना, सेवेरो ओकोआ व मार्शल नीरेनबर्ग, फ्रांसिस क्रिक के सहयोग से इस भाषा का चेकर बोर्ड बनाया जा सका।

यद्यपि आनुवंशिक भाषा D.N.A. अणु में नाइट्रोजनी क्षारको के अनुक्रम के रूप में कोडित होती है, लेकिन कूट अक्षरों को R.N.A. में पाए जाने वाले अनुक्रम द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

आनुवंशिक कूट की विशेषताएँ

1. कूट त्रिक होता है (The code is triplet) – m-R.N.A. के तीन क्षारको का क्रम एक ऐमीनो अम्ल का आनुवंशिक कूट होता है। जैसे AUG न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम मेथियोनीन, GUG अनुक्रम वेलीन ऐमीनो अम्ल को कोडित करता है।

2. कूट अपह्वासित है (The code is degenerate) – इसका अर्थ है कि

एक से अधिक त्रिक एक ही ऐमीनो अम्ल को कोड करने में सक्षम हैं AGA AGG CGA सभी आर्जिनीन के कूट है। उत्परिवर्तन द्वारा एक क्षारक में परिवर्तन आने के पश्चात् भी आर्जिनीन ही श्रृंखला में आएगा।

3. कूट अनतिव्यापी है (The code is non-overlapping) – इसका अर्थ है कि एक m-R.N.A. अणु में एक ही क्षारक अक्षर के प्रयोग को विभिन्न रूपों में प्रयोग नहीं किया जाता है अर्थात् AUC GUU को केवल AUC तथा GUU के रूप में प्रयुक्त किया जाएगा। इसे AUC तथा CGU के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता।

4. कूट असंदिग्ध है (The code is Unambiguous) – एक विशेष आनुवंशिक कूट हमेशा एक निश्चित ऐमीनो अम्ल को ही कोड करता है। यह दो या अधिक ऐमीनो अम्लों को कोडित नहीं करेगा।

5. कूट सार्वत्रिक है (The code is universal) – एक आनुवंशिक कूट सभी जीवों में उसी ऐमीनो अम्ल को कोडित करता है।

6. कूट कॉमारहित है (The code is commaless) – दो संलग्न कूटों के बीच विराम या कॉमा नहीं होता है अर्थात् कूट लगातार होते हैं; जैसे – AUG Met

7. समारम्भ कूट तथा समापन कूट – ज्ञात 64 आनुवंशिक कूट में से एक

समारम्भ कूट AUG तथा तीन समापन कूट UAA UAG UGA होते हैं। ये क्रमशः पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के शुरू करने और समाप्त करने या विमोचन से सम्बन्धित होते हैं।

    —–Exam Tips and Tricks ——-

1- यूपी बोर्ड परीक्षा में सफलता के लिए सिलेबस को अच्छी तरह समझे और नियमित अभ्यास करें ।

2- पढ़ाई कि योजना बनाए जिसमे हर विषय के लिए समय हो समझो टॉपिक पर ज्यादा फॉक्स करे।

3- पेपर में पहले आसान सवाल हल करें सभी प्रश्नों के उत्तर दें बिन कोई छोड़ें। 

4- परीक्षा में व्हाइटनर(whitener) का उपयोग न करें केवल काला(black), नीला (blue) पेन का उपयोग करें । 

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