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Class 12 Biology Chapter 4 Most Important Questions and Answers (Hindi Medium) – जीव विज्ञान अध्याय 4 के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

Class 12 Biology Chapter 4 Important Question Answer in Hindi

प्रश्न 1. मनुष्य में X-लिंग सहलग्न अप्रभावी व्याधियों के दो उदाहरण दीजिए

उत्तर :(1) वर्णान्धता (colourblindness) तथा

(2) हीमोफीलिया (haemophilia)

प्रश्न 2. बैक क्रॉस से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : F₁ संतति का किसी भी जनक अर्थात् शुद्ध प्रभावी या शुद्ध अप्रभावी जनक से संकरण बैक क्रॉस (back cross) कहलाता है।

प्रश्न 3. टेस्ट क्रॉस या परीक्षण संकरण से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : जब किसी प्रभावी फीनोटाइप वाले जीव का जीनोटाइप ज्ञात करने के लिए उसका संकरण शुद्ध अप्रभावी जनक से कराया जाता है, तो इसे टेस्ट क्रॉस (test cross) कहते हैं।

प्रश्न 4. लिंग-सहलग्न लक्षण को परिभाषित कीजिए। मनुष्य में लिंग-सहलग्न वंशागति के द्वारा उत्पन्न दो व्याधियों के नाम लिखिए।

उत्तर : मनुष्यो में कुछ आनुवंशिक लक्षणो के जीन लिंग गुणसूत्र से सम्बन्धित होते हैं। इन लक्षणो को लिंग-सहलग्न लक्षण कहते हैं।

प्रश्न 5. टर्नर एवं क्लाइनफेल्टर सिण्ड्रोमों में गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती है?

उत्तर : 23वें जोड़ी गुणसूत्र या लिंग गुणसूत्र के मोनोसोमिक होने के कारण 45 (44+ X) गुणसूत्र होते हैं।

क्लाइनफेल्टर सिण्ड्रोम लिंग गुणसूत्र की ट्राइसोमी के कारण बनता है, अतः गुणसूत्र संख्या 47 (44 + XXY) होती है।

प्रश्न 6. वंशागति का गुणसूत्र सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया? 

उत्तर : वंशागति का गुणसूत्र सिद्धान्त सटन और बोवेरी ने प्रतिपादित किया।

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प्रश्न 7. जीनरूप तथा दृश्यरूप लक्षण पर टिप्पणी करके लिखिए?

उत्तर : दृश्यरूप या लक्षण प्ररूप या फीनोटाइप (Phenotype) – किसी लक्षण का भौतिक या बाह्य दृश्य रूप लक्षण प्ररूप कहलाता है; जैसे-लम्बा पौधा, बौना पौधा, बैंगनी पुष्प, सफेद पुष्प आदि।

यह समयुग्मजी या विषमयुग्मजी हो सकते हैं। किसी दिए जीनोटाइप के फीनोटाइप समय के साथ बदल सकते हैं। दो अलग-अलग जीनोटाइप का एक ही फीनोटाइप हो सकता है।

जीनरूप या जीन प्ररूप या जीनोटाइप (Genotype) – किसी लक्षण की जीनी अभिव्यक्ति को जीन प्ररूप कहते हैं। जैसे लाल पुष्प वाले पौधे का समयुग्मकी जीन प्ररूप RR जबकि विषमयुग्मकी जीन प्रारूप Rr होता है। लम्बे पौधे में यह, TT या Tt हो सकता है। किसी जीव का जीनोटाइप जीवनभर समान रहता है।

प्रश्न 8. अपूर्ण प्रभावित पर टिप्पणी लिखिए?

उत्तर : अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance) – कुछ पौधों में एक लक्षण के दो विपर्यासी रूपों में संकरण कराने पर F1 पीढ़ी में मध्यवर्ती लक्षण प्रकट होता है अर्थात् दो विपरीत लक्षणों में से कोई भी पूर्णतया प्रभावी लक्षण (dominant character) नहीं होता। दोनों लक्षण स्वयं को प्रदर्शित करते हैं। इस विशिष्टता को अपूर्ण प्रभाविता कहते हैं। इसकी खोज कार्ल कोरेन्स (Carl Correns, 1903) ने की थी।

जब गुलाबाँस (Mirabilis jalapa or 4 O’clock) पौधों के एक लाल पुष्प वाले तथा एक सफेद पुष्प वाले पौधे में संकरण कराया जाता है, तब F1 पौड़ी में गुलाबी पुष्प वाले पौधे उत्पन्न होते हैं। जब F1 पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण कराया जाता है, तब F2 पीढ़ी में लाल, गुलाबी व सफेद पुष्प वाले पौधे 1:2:1 के अनुपात में प्राप्त होते हैं। अपूर्ण प्रभाविता में F_{2} पीढ़ी का जीनोटाइप तथा फीनोटाइप अनुपात 1:2:1 होता है।

प्रश्न 9. क्रॉसिंग ओवर क्या है? यह कोशिका विभाजन की किस अवस्था में होता है?

उत्तर : क्रॉसिंग ओवर (Crossing over) अर्द्धसूत्री कोशिका विभाजन की पूर्वावस्था प्रथम के अन्तर्गत पैकीटीन उप अवस्था टेट्रावैलेण्ट में समजात गुणसूत्रों (डी०एन०ए०) अभगिनी या क्रोमेटिड (nonsister chromatids) के मध्य प्रतिकर्षण के फलस्वरूप काइऐज्मेटा (chaismata) पर आनुवंशिक पदार्थ का आदान-प्रदान होने की क्रिया को विनिमय या क्रॉसिंग ओवर कहते हैं। इसके फलस्वरूप गुणसूत्रों की जीन संरचना में परिवर्तन आ जाने से लक्षणों में भिन्नता आ जाती है।

प्रश्न 10. सहप्रभावित पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर : सहप्रभाविता – वंशागति का वह प्रकार, जिसमें किसी विषमयुग्मजी (heterozygous) में दोनों एलील अभिव्यक्त होते हैं, सहप्रभाविता कहलाता है। मनुष्य में AB रक्त समूह इसका उदाहरण है।

एलील Ia से एण्टीजन A तथा IB से एण्टीजन B बनता है। i एलील कोई एण्टीजन नहीं बनाता। एलील IA व IB दोनों सहप्रभावी है। किसी मनुष्य में 3 में से 2 एलील हो सकते हैं। जब एलील IA IB प्रकार के होते हैं, तब रक्त समूह

AB होता है, जो सहप्रभाविता का उदाहरण है।

प्रश्न 11. अगुणित-द्विगुणित लिंग निर्धारण क्या है? मधुमक्खी में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि को समझाइए।

उत्तर: पक्षियों में लिंग निर्धारण (Sex determination in birds) – नर पक्षी समयुग्मकी (homogametic) होते हैं। इनमें लिंग गुणसूत्र ZZ होते हैं। अतः सभी शुक्राणु Z/ गुणसूत्र वाले होते हैं। मादा पक्षी विषमयुग्मकी (heterogametic) होती हैं। इनमे लिंग गुणसूत्र ZW होते हैं, अतः अण्डाणु दो प्रकार के बनते हैं-50% Z/गुणसूत्र वाले तथा 50% W-गुणसूत्र वाले। Z-गुणसूत्र वाले अण्डाणु निषेचन के पश्चात् नर पक्षी और W-गुणसूत्र वाले अण्डाणु निषेचन के पश्चात् मादा पक्षी को जन्म देते हैं।

मधुमक्खियों में लिंग निर्धारण (Sex determination in

honeybees) – मादा मधुमक्खी द्विगुणित (रानी) में 32 गुणसूत्र, श्रमिक मधुमक्खी में 32 गुणसूत्र (द्विगुणित) तथा ड्रोन (drones) या नर मधुमक्खी में 16 गुणसूत्र (अगुणित) होते हैं। रानी मक्खी में अण्डाणु निर्माण अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा होता है, जबकि नर या ड्रोन में शुक्राणु निर्माण समसूत्री विभाजन द्वारा होता है। नर (ड्रोन) का विकास अगुणित अण्डाणुओं से अनिषेकजनन (parthenogenesis) द्वारा होता है। अनिषेचित अण्ड (Unfertilized egg) से हुआ जीव का विकास अनिषेकजनन (parthenogenesis) कहलाता है। निषेचित अण्डाणुओं से द्विगुणित श्रमिक व रानी मक्खी बनते हैं। रॉयल जेली खाने वाली मक्खी मादा मक्खी बनता है जबकि इससे वंचित सभी मक्खी श्रमिक बनती है। इसे अगुणित-द्विगुणित लिंग निर्धारण प्रणाली कहते हैं।

प्रश्न 12. मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता हैं?

उत्तर : लिंग गुणसूत्र (Sex chromosome) – एकलिंगी प्राणियों में एक जोड़ी गुणसूत्र जो प्राणी के लिंग का निर्धारण करते हैं, लिंग गुणसूत्र कहलाते है, शेष गुणसूत्रों को अलिंग गुणसूत्र (autosomes) कहते हैं। मैक्कलंग (McClung, 1902) के लिंग निर्धारण का गुणसूत्रवाद (Chromosomal theory of sex determination) के अनुसार (मानव में XX-XY लिंग गुणसूत्र द्वारा लिंग का निर्धारण होता है।

लिंग निर्धारण की XY विधि (The XY-method of Sex determination) – स्त्री में दोनों लैंगिक गुणसूत्र XX होते हैं तथा पुरुष में एक लैंगिक गुणसूत्र X एवं दूसरा Y होता है। समयुग्मकी (homogametic) स्त्री में अण्डजनन द्वारा बने सभी अण्डाणुओं में एक अगुणित जोड़ा दैहिक गुणसूत्रों का तथा एक X लैंगिक गुणसूत्र होता है (A + X) अतः सभी अण्डाणु समान होते हैं। इसके विपरीत विषमयुग्मकी (heterogametic) पुरुष में शुक्राणुजनन से बने आधे शुक्राणुओ में एक अगुणित जोडा दैहिक गुणसूत्रों का तथा X/गुणसूत्र व आधे शुक्राणुओं में एक जोडा दैहिक गुणसूत्रों का तथा Y गुणसूत्र ( A + X या A+Y) होते हैं। इस प्रकार, दो प्रकार के शुक्राणुओं का निर्माण होता है। 50% शुक्राणु A + X तथा शेष 50% A + Y गुणसूत्रों वाले होते हैं।

निषेचन के समय यदि A + Y शुक्राणु का समेकन अण्डाणु के साथ होता है, तब नर सन्तान (पुत्र) पैदा होती है। यदि अण्डाणु का समेकन A + X शुक्राणु के साथ होता है, तब मादा सन्तान (पुत्री) पैदा होती है। यह केवल संयोग है कि कौन-से शुक्राणु का समेकन अण्डाणु के साथ होता है। इसी के आधार पर सन्तान का लिग निर्धारण होता है।

प्रश्न 13. किसी सामान्य स्त्री, जिसमें दोनों जीन सामान्य हैं, का विवाह किसी हीमोफीलिया ग्रस्त पुरुष से कर दिया जाता है। उनकी सन्तानों में इस रोग की वंशागति को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए। 

उत्तर: हीमोफीलिया एक X महलग्न अप्रभावी लक्षण है। पुरुष में हीमोफीलिया का मात्र एक जीन होने पर यह रोग प्रदर्शित हो जाता है, क्योंकि Y गुणसूत्र X के समजात नहीं होता। स्त्रियों एक सामान्य प्रभावी जीन के कारण प्रायः वाहक (carrier) होती हैं। स्त्रियों में दोनों अप्रभावी जोन्स की उपस्थिति में ही रोग के लक्षण प्रकट होते है।

प्रश्न 14. प्रथम संतति पीढ़ी एवं द्वितीय संतति पीढ़ी में अन्तर लिखिए।

उत्तर : शुद्ध जनको के मध्य हुए संकरण से उत्पन्न पीढ़ी प्रथम संतति पीढ़ी कहलाती है। पादपो के सन्दर्भ में जनक पीढ़ी में बने बीज तथा उनसे उत्पन्न पौधे F₁ पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रथम संतति पीढ़ी में केवल प्रभावी लक्षण प्रदर्शित होते हैं। संतति में किसी लक्षण के लिए दोनों तुलनात्मक जीन्स उपस्थित रहते हैं, अतः संतति संकर (hybrid) होती है। F₁ पीढ़ी के सदस्यों में स्वपरागण कराने पर प्राप्त संतति F2 पीढ़ी कहलाती है। इसमें शुद्ध जनकीय रूपों के साथ-साथ संकर भी प्राप्त होते हैं। दो जीनो की वंशागति में F₂ पीढ़ी में जनकीय रूपों के साथ-साथ नये पुनर्संयोजनो (recombinants) का भी निर्माण होता है।

प्रश्न 15. पक्षियों तथा मधुमक्खियों में लिंग निर्धारण समझाइए।   [important]

उत्तर: पक्षियों में लिंग निर्धारण (Sex determination in birds)- नर पक्षी समयुग्मकी (homogametic) होते हैं। इनमें लिंग गुणसूत्र ZZ होते हैं। अतः सभी शुक्राणु Z/ गुणसूत्र वाले होते हैं। मादा पक्षी विषमयुग्मकी (heterogametic) होती है। इनमें लिंग गुणसूत्र ZW होते हैं, अतः अण्डाणु दो प्रकार के बनते हैं-50% Z/गुणसूत्र वाले तथा 50% W-गुणसूत्र वाले। Z-गुणसूत्र वाले अण्डाणु निषेचन के पश्चात् नर पक्षी और W गुणसूत्र वाले अण्डाणु निषेचन के पश्चात् मादा पक्षी को जन्म देते हैं।

मधुमक्खियों में लिंग निर्धारण (Sex determination in honeybees) – मादा मधुमक्खी द्विगुणित (रानी) में 32 गुणसूत्र, श्रमिक मधुमक्खी मे 32 गुणसूत्र (द्विगुणित) तथा ड्रोन (drones) या नर मधुमक्खी में 16 गुणसूत्र (अगुणित) होते हैं। रानी मक्खी में अण्डाणु निर्माण अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा होता है, जबकि नर या ड्रोन में शुक्राणु निर्माण समसूत्री विभाजन द्वारा होता है। नर (ड्रोन) का विकास अगुणित अण्डाणुओं से अनिषेकजनन (parthenogenesis) द्वारा होता है। अनिषेचित अण्ड (Unfertilized egg) से हुआ जीव का विकास अनिषेकजनन (parthenogenesis) कहलाता है। निषेचित अण्डाणुओं से द्विगुणित श्रमिक व रानी मक्खी बनते हैं। रॉयल जेली खाने वाली मक्खी मादा मक्खी बनता है जबकि इससे वंचित सभी मक्खी श्रमिक बनती हैं। इसे अगुणित-द्विगुणित लिंग निर्धारण प्रणाली कहते है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु:- U.P बोर्ड परीक्षा में सफल होने के लिए अपने syllabus को अच्छी तरह से समझें और नियमित रूप से अभ्यास करते रहे साथ ही हर विषय पर ध्यान दे 

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