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Class 12 Biology Chapter 3 Important Questions Answers in Hindi | मानव प्रजनन प्रश्नोत्तर

Class 12 Biology Chapter 3 Important Questions in Hindi

प्रश्न 1. ट्यूबेक्टोमी क्या है?

उत्तर : स्त्रियों में शल्य क्रिया द्वारा फैलोपियन नलिकाओं को काटकर बाँध देने की क्रिया ट्यूबेक्टोमी (tubectomy) कहलाती है। यह एक स्थायी गर्भनिरोधक युक्ति है।

प्रश्न 2. IUD का फुल फॉर्म लिखिए।

उत्तर: IUD-इण्ट्रा यूटेराइन डिवाइस (Intra Uterine Devices)

प्रश्न 3. शुक्रवाहिका उच्छेदन या वैसेक्टोमी क्या है?

उत्तर : पुरुषों में शल्य क्रिया द्वारा शुक्रवाहिनियों को काटकर बाँध देने की क्रिया वैसेक्टोमी (vasectomy) कहलाती है। यह एक स्थायी गर्भ निरोधक युक्ति है। इसका प्रमुख लाभ यह है कि यह एक अत्यधिक कारगर (effective) विधि है, लेकिन यह आसानी से उत्क्रमणीय नहीं है।

प्रश्न 4. गर्भ निरोधक क्षमता बढ़ाने में पुरुषों द्वारा अपनाए गए रोध (वैरियर) विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर : रोध (अवरोध) या बैरियर विधि गर्भ निरोध की यान्त्रिक विधि है, जिसमे किसी भौतिक युक्ति द्वारा शुक्राणुओं का अण्ड के पास पहुँचना रोक दिया जाता है। निरोध या कण्डोम पुरुषों हेतु प्रयोग की जाने वाली एकमात्र रोध विधि है। यह प्रयोग में सरल है. प्रयोगकर्ता की गोपनीयता बनी रहती है, इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता तथा यह यौन संचारित रोगों से भी बचाता है।

प्रश्न 5. IVF तथा GIFT का पूरा रूप लिखिए।

उत्तर: IVF इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization) GIFT गैमीट इण्ट्री फैलोपियन ट्रांसफर (Gamete Intra Fallopian Transfer

प्रश्न 6. स्व पात्रे निषेचन (आई०वी०एफ०) क्या है?

उत्तर : पात्रे निषेचन (In Vitro Fertilization IVF) शरीर से बाहर प्रयोगशाला में (काँच की पेट्री प्लेट में) अण्डाणु का शुक्राणु द्वारा निषेचन पात्रे निषेचन कहलाता है।

यह परखनली शिशु तकनीक का एक पद है।

प्रश्न 7. किसी व्यक्ति को यौन संचारित रोगों के संपर्क में आने से बचने के लिए कौन से उपाय अपनाने चाहिए।

उत्तर : यौन सम्बन्धों के कारण संचरित रोग यौन संचरित रोग कहलाते हैं। इन्हें सामान्यतया एस०टी०डी० (Sexually Transmitted Diseases: STD) या रतिज रोग (Venereal Disease) या जनन मार्ग संक्रमण (Reproductive Tract Infections: RTI) भी कहते हैं।

उदाहरण-एड्स, सिफलिस, गौनोरिया, जननिक होंज आदि।

निम्नलिखित युक्तियों को अपनाने से यौन संचरित रोगों के संक्रमण से बचा जा सकता है-

(1) प्राथमिक रूप से लैंगिक सम्पर्क से फैलने वाले रोग किसी दुर्घटनावश या आकस्मिक रूप से नहीं फैलते। ये हमारे सोचे समझे सचेतन व्यवहार की परिणति होते हैं, अतः अपने आप पर नियन्त्रण कर नैतिकता का पालन कर इनसे बचा जा सकता है।

(2) किसी अनजान व्यक्ति या अनेक व्यक्तियों से यौन सम्बन्ध (multiple sex relation) न रखे।

(3) मैथुन के समय कण्डोम (condoms) का उपयोग करें।

(4) रोग की आशंका होने पर तुरन्त योग्य चिकित्सक से सम्पर्क करके पूरा इलाज कराएँ।

प्रश्न 8. IVF तकनीकी के बारे मे लिखिए।

उत्तर : टेस्ट ट्यूब बेबी शब्द एक भ्रामक शब्द है, क्योंकि सहायक जनन प्रौद्योगिकी की इस तकनीक में भी शिशु का विकास स्त्री के गर्भाशय में ही होता है। स्व पात्रे निषेचन (in vitro fertilization) का प्रयोग होने के कारण ही इसे टेस्ट ट्यूब बेबी कहा जाता है। यह तकनीक उन दम्पतियों हेतु प्रयोग की जाती है जिन स्त्रियों में निषेचन नहीं होता अथवा स्त्रियो में अण्डाणु उत्पन्न नहीं होते अथवा पुरुष के वीर्य में शुक्राणु कम होते हैं आदि। ए०आर०टी० की सहायता से स्त्रियो/दाता के अण्डाणुओं का निषेचन उसके पति के शुक्राणु से प्रयोगशाला में कृत्रिम परिस्थितियों में कराया जाता है। निषेचित युग्मनज या 8 कोशिकीय भ्रूण को फैलोपियन नलिका में अथवा 32 कोशिकीय भ्रूण को गर्भाशय में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। गर्भावधि पूर्ण होने पर स्त्री सामान्य रूप से शिशु को जन्म देती है। इस प्रकार के शिशु को टेस्ट ट्यूब शिशु कहते हैं।

प्रश्न 9. एम०टी०पी० अथवा सगर्भता का चिकित्सकीय समापन क्या है? इसका क्या उद्देश्य है?

उत्तर : गर्भावस्था पूर्ण होने से पहले स्वैच्छिक रूप से गर्भ के समापन को चिकित्सकीय सगर्भता समापन (Medical Termination of Pregnancy: MTP) कहते है। यह अनचाही सगर्भता से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है, जो लापरवाही से किए गए असुरक्षित यौन सम्बन्धों या मैथुन के समय गर्भनिरोधक उपायों के असफल रहने या बलात्कार जैसी घटनाओं के कारण होने वाली सगर्भता होती है। कभी-कभी यह चिकित्सकीय कारणों से भी आवश्यक हो जाती है, जहाँ सगर्भता माँ अथवा भ्रूण या दोनों के लिए घातक हो सकती है। यह तकनीक 12 सप्ताह से पूर्व तक सुरक्षित मानी जाती है। इसे प्रेरित गर्भपात (induced abortion) भी कहते है। यह किसी प्रशिक्षित कुशल चिकित्सक की देखरेख में, उचित समय सीमा व सुसज्जित क्लिनिक में कराया जाता है। इसमें की गई लापरवाही संक्रमण घातक रक्त स्राव, गर्भाशय में छिद्र अथवा मृत्यु का भी कारण बन सकती है। अपने देश में इसे सन् 1971 से वैधानिक मान्यता प्राप्त है।

प्रश्न 10.परिवार नियोजन पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: भारत में सन् 1951 में प्रारम्भ किए महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम परिवार नियोजन जिसका प्रमुख कार्य जनसंख्या नियन्त्रण था, का नाम बदलकर सन् 1977-78 में परिवार कल्याण (Family welfare) कर दिया गया। इसका नाम स्वयं इसके परिवार, समाज व राष्ट्र हित में होने की व्याख्या करता है। इस कार्यक्रम से। जनसंख्या विस्फोट पर नियन्त्रण के प्रभावी उपाय किए गए हैं। जनसंख्या नियन्त्रण को देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका है। जनसख्या वृद्धि से खाद्य समस्या की आपूर्ति, शिक्षा व रोजगार की समस्या, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा समस्या, संसाधनों की कमी, आवास की समस्या आदि उत्पन्न होती है। परिवार कल्याण जैसे कार्यक्रम जनसंख्या पर नियन्त्रण कर इन समस्याओं की विकरालता को कम करते हैं।

साथ ही वह कार्यक्रम व्यक्ति को उच्च गुणवत्ता पूर्ण जीवन जीने के अवसर प्रदान कर समाज में उसके योगदान में परोक्ष रूप से वृद्धि करते हैं, अतः परिवार नियोजन राष्ट्र हित में है।

प्रश्न 11. एम्नियोसेन्टेसिस से आप क्या समझते हैं। संक्षेप में समझाइए। अथवा एम्नियोसेन्टेसिस पर एक टिप्पणी लिखिए। 

उत्तर : उल्बवेधन या एम्नियोसेन्टेसिस (Amniocentesis) – मानव जनन के अन्तर्गत भ्रूण के चारों ओर एक भ्रूणकला एम्निऑन (amnion) पायी जाती है तथा भ्रूण इस भ्रूणकला से ढकी व तरल से भरी एक गुहा उल्ब गुहा (amniotic cavity) में स्थित होता है। इस तरल में कुछ भ्रूणीय कोशिकाएँ भी पायी जाती हैं। उल्बवेधन एम्नियोसेन्टेसिस तकनीक में एक सिरिज की मदद से तरल की कुछ मात्रा एम्नियोटिक गुहा से निकाल ली जाती है। इस तरल में निलम्बित कोशिकाओं के गुणसूत्रों (chromosomes) की जाँच से भ्रूण की किसी विकृति या असामान्यता का पता लगाया जा सकता है। चूंकि यह जाँच गुणसूत्रों पर आधारित है, अतः इससे भ्रूण के लिंग का पता भी लग जाता है। इस तकनीक का भ्रूणीय लिंग की जाँच तथा कन्या भ्रूण हत्या में प्रयोग किया गया, अतः अब इस तकनीक पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है।

इस तकनीक में एम्नियोटिक द्रव की मात्रा, भ्रूण की स्थिति, उम्र, अपरा का स्थान आदि की सटीक जानकारी के लिए अल्ट्रासाउण्ड स्कैनिंग की जाती है।

यह परीक्षण प्रायः गर्भकाल के 16वें से 18वें सप्ताह में किया जाता है। भ्रूण के लिंग जाँच की सभी विधियों पर अब इस उद्देश्य के लिए रोक लगाई गयी है। एक चिकित्सक को अपने क्लिनिक पर यह लिखना अनिवार्य किया गया है कि “यहाँ भ्रूण का लिंग परीक्षण नहीं किया जाता।” इससे भ्रूण के मेटाबोलिक डिफेक्ट्स का भी पता लगता है। कोरियोनिक विलस सैम्पलिग (chorionic villus sampling) अल्ट्रासाउण्ड आदि का भी भ्रूण लिग जाँच में उपयोग किया जाता था।

प्रश्न 12. जनसंख्या विस्फोट और जन्म नियंत्रण के बारे मे विस्तार से लिखिए।

उत्तर: जनसंख्या विस्फोट- अपेक्षाकृत अल्प समय में हुई तीव्र जनसंख्या वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट कहते हैं। यह संसाधनों के दोहन में अत्यधिक वृद्धि कर पारिस्थितिक असन्तुलन जैसी समस्याओं को जन्म देने के साथ-साथ मानव के सामने स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ भी उत्पन्न करता है।

जनसंख्या विस्फोट के परिणाम अथवा परिवार नियोजन की

आवश्यकता-बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण निम्नलिखित समस्याएँ उत्पन्न हो रही है-

1. खाद्य आपूर्ति की समस्या – जनसंख्या वृद्धि के कारण हमारे देश के

समक्ष खाद्य आपूर्ति की समस्या उत्पन्न हो गई है। जनसंख्या की वृद्धि के अनुपात में खाद्यान्नों का उत्पादन कम हो रहा है। बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।

2. शिक्षा व्यवस्था की समस्या-शिक्षण संस्थाओं की कमी के कारण

बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रवेश पाना कठिन हो रहा है।

3. रोजगार की समस्या – जनसंख्या की तीव्र वृद्धि से बेरोजगारी की

समस्या बढ़ती जा रही है। बेरोजगार व्यक्ति के परिवार को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

4. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा समस्या – परिवार में अधिक बच्चे होने से माँ का स्वास्थ्य खराब हो जाता है, जिससे बच्चों की उचित देखभाल के अभाव में उनका उचित विकास नहीं होता। जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में उचित उपचार एवं औषधियों की व्यवस्था का भी अभाव रहता है।

उपर्युक्त कारणों से स्पष्ट है कि परिवार नियोजन समय की आवश्यकता है।

जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण के उपाय

1. वैधानिक उपाय – सरकार ने कानून बनाकर विवाह के लिए आयु की निम्नतम सीमा तय की हैं। लड़कियों के लिए यह 18 वर्ष तथा लड़कों के लिए 21 वर्ष है।

साकार ने छोटे परिवार वाले दम्पतियों के प्रोत्साहन हेतु भी कुछ योजनाएं शाम्म की है। अकेली बेटी (single girl child) वाले परिवारों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएँ दी है। बाल विवाह को कानूनन अपराध बताया है।

2. शिक्षा व जागरूकता – जनसंख्या वृद्धि को रोकने तथा परिवार को सीमित रखने के सम्बन्ध में जनता को शिक्षित करने के कार्यक्रम में तेजी लानी चाहिए।

3. आर्थिक स्थिति में सुधार- लोगों को उचित रोजगार तथा व्यवसाय मिलने चाहिए जिससे उनके आर्थिक स्तर में सुधार हो सके।

4. परिवार कल्याण सम्बन्धी कार्यक्रमों को बढ़ाना – परिवार को सीमित रखने के लिए, परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ व्यवस्था करनी चाहिए। जैसे-सीमित परिवार वाले व्यक्तियों के बच्चों की निःशुल्क शिक्षा, मुफ्त इलाज की व्यवस्था, सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता या अन्य कार्यक्रमों में प्राथमिकता आदि। गर्भ निरोधको सम्बन्धी जागरूकता व इनका मुफ्त वितरण सुनिश्चित होना चाहिए।

5. स्वास्थ्य एवं यौन शिक्षा- बालक बालिकाओं के लिए किशोरावस्था से ही स्वास्थ्य एवं यौन शिक्षा को अनिवार्य कर देना चाहिए जिससे वे अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान दे सकें। यौन रोगों के सम्बन्ध में जागरूकता पैदा करनी चाहिए।

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