CLASS 12 Chemistry Chapter 10 Important Questions in Hindi
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण परिभाषाएं —-
▶ प्रकाश सक्रिय पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या पॉलिहाइड्रॉक्सी कीटोन या वे यौगिक जो जल-अपघटन पर इन्हें देते हैं, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं।
▶ टॉलेन अभिकर्मक तथा फेहलिंग विलयन को अपचयित करने वाली शर्कराएँ, अपचायक शर्कराएँ कहलाती है। उदाहरण- मोनोसैकेराइड, डाइसैकेराइड (सुक्रोस के अतिरिक्त)।
▶ C₁ के विन्यास में भिन्नता रखने वाले त्रिविम समावयवी ऐनोमर कहलाते हैं।
▶ ग्लूकोस, फेनिल हाइड्रेजीन के 3 मोलो के साथ ग्लूकोसाजोन बनाता है।
▶ फ्रक्टोस सर्वाधिक मीठा मोनोसैकेराइड है।
▶ ग्लाइसीन के अतिरिक्त सभी प्राकृतिक -ऐमीनो अम्लों में एक असममित a-कार्बन परमाणु होता है।
▶ मानव शरीर में संश्लेषित नहीं होने वाले ऐमीनो अम्ल आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं। उदाहरण- आर्जिनिन, वैलिन, मेथियोनीन, लयूसिन, थिओनिन, फेनिल ऐलेनिन, हिस्टीडीन, आइसोल्यूसिन, लाइसिन तथा ट्रिप्टोफेन ।
▶ प्रोटीन की प्राथमिक संरचना उपस्थित ऐमीनो अम्लों की संख्या एवं उनके क्रम को दर्शाती है जबकि इनकी द्वितीयक संरचना इनके अभिविन्यास या आकृति की जानकारी देती है।
▶ विटामिन A, D, E तथा K वसा में घुलनशील होते हैं जबकि अन्य जल में घुलनशील होते है।
▶ न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार के होते हैं- (1) DNA (डीऑक्सीराइबोस न्यूक्लिक अम्ल) (2) RNA (राइबोस न्यूक्लिक अम्ल)।
RNA में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल (पिरिमिडीन क्षार) होता है।
प्रश्न 1- . एन्जाइम क्या होते हैं?
[2 marks important]
उत्तर : एन्जाइम जैव उत्प्रेरक होते हैं। जीवधारियो में होने वाली विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में समन्वयन के कारण ही जीवन सम्भव होता है। उदाहरणार्थ – भोजन का पाचन, उपयुक्त अणुओं का अवशोषण तथा अन्ततः ऊर्जा का उत्पादन। इस प्रक्रम में अभिक्रियाएँ एक अनुक्रम में होती है तथा ये सभी अभिक्रियाएँ शरीर में मध्यम परिस्थितियो मे सम्पन्न होती है। यह कुछ जैव-उत्प्रेरकों की सहायता से होता है। इन्हीं जैव-उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहा जाता है। रासायनिक रूप में लगभग सभी एन्जाइम गोलिकाकार प्रोटीन होते हैं। एन्जाइम किसी विशेष अभिक्रिया अथवा विशेष क्रियाधार के लिए विशिष्ट होते है अर्थात् प्रत्येक जैव-तन्त्र के लिए भिन्न एन्जाइम की आवश्यकता होती है,
इसलिए एन्जाइम अन्य प्रचलित उत्प्रेरकों से भिन्न होते हैं। ये अत्यन्त सक्रिय होते हैं तथा इनकी अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा की ही आवश्यकता होती है। वे अनुकूल ताप (310K) तथा pH (7.4) एवं एक वायुमण्डलीय दाब पर कार्य करते हैं।
प्रश्न -2 प्रोटीन (Protein ) क्या हैं? प्रोटीन के प्रमुख कार्य बताइए।
[ 5 marks important]
उत्तर : प्रोटीन– यह नाइट्रोजनयुक्त संकीर्ण कार्बनिक यौगिक होते हैं। प्रोटीन ৫-ऐमीनो अम्ल के बहुलक होते हैं। प्रोटीन में -ऐमीनो अम्ल परस्पर पेप्टाइड बन्धों द्वारा जुड़े रहते हैं।
प्रोटीन के उपयोग अथवा कार्य अथवा महत्त्व (1) प्रोटीन का मुख्य कार्य शरीर रचना में भाग लेना है। ये हमारे शरीर का मुख्य भाग बनाती हैं।
(2) शरीर में हुई टूट-फूट की मरम्मत के लिए भी प्रोटीन की आवश्यकता होती है।
(3) शरीर में उपापचयी क्रिया में एन्जाइम जैव उत्प्रेरक का कार्य करते है। सभी एन्जाइम ग्लोबुलर प्रोटीन होते हैं।
(4) आवश्यकता से अधिक प्रोटीन शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। प्रोटीनों का विकृतिकरण- सभी प्रोटीन प्रकाश क्रियाशील व कोलॉइड
होती है। जब किसी प्रोटीन को गर्म किया जाता है या इसमें अम्ल या क्षार मिलाते हैं, तो यह विलयन से स्कन्दित या अवक्षेपित हो जाती है। प्रोटीन की यह अवक्षेपण की स्थिति विकृति तथा यह प्रक्रिया विकृतिकरण कहलाती है। यह पाया गया है कि विकृतिकरण की अभिक्रिया प्रोटीनों के समविभव बिन्दु के पास होती है। यह क्रिया गर्म करने के अतिरिक्त अन्य कई विधियों द्वारा की जा सकती है जैसे अम्लों या क्षारों के विलयनों द्वारा, भारी तत्वों; जैसे-Cu2+, Cd2+, Hg2+, Ag+ आदि के विलयनों द्वारा, कार्बनिक विलायको एथेनॉल या ऐसीटोन द्वारा, अपमार्जक द्वारा यूरिया की अधिक सान्द्रता द्वारा आदि। कुछ भौतिक विधियों जैसे पराबैंगनी प्रकाश विकिरण, X-किरणों और अधिक हिलाने आदि भी विकृतिकरण की क्रिया करती हैं। विकृतिकरण की प्रक्रिया से प्रोटीनों के भौतिक गुणों; जैसे- प्रकाशिक घूर्णन, घुलनशीलता, भौतिक क्रियाएँ आदि में परिवर्तन होते हैं। अधिकतर विकृतिकरण की प्रक्रिया अनुत्क्रमणीय होती हैं, लेकिन कुछ उदाहरण ऐसे हैं, जिनमें विकृतिकरण की क्रिया उत्क्रमणीय होती है ।
प्रश्न 3. DNA की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
[2020, 2026 Expected]
उत्तर : DNA की द्विकुण्डलित संरचना को जेम्स वाटसन तथा फ्रांसिस क्रिक ने प्रस्तावित किया। इस संरचना में दो न्यूक्लिक अम्ल श्रृंखलाएँ परस्पर कुण्डलित रहती हैं तथा एक-दूसरे से क्षारक युग्मों के मध्य निर्मित होने वाले हाइड्रोजन बन्धों के द्वारा जुड़ी रहती हैं ।
चूँकि हाइड्रोजन बन्ध का निर्माण क्षारकों के विशिष्ट युग्मों के मध्य ही होता है अतः दोनों रज्जुक एक-दूसरे की पूरक होती हैं। एडीनीन सदैव थायमीन के साथ हाइड्रोजन बन्ध निर्मित करता है जबकि साइटोसीन ग्वानीन के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाता है।
प्रश्न4- विटामिन ( Vitamin) किसे कहते हैं ? इसकी कमी से होने वाले रोगों के बारे में बताइए ।
[2014]
उत्तर : ‘विटामिन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- एक Vita जिसका अर्थ है life (जीवन) तथा दूसरा Amins जिसका अर्थ है Base (आधार) अर्थात् विटामिन जीवन के आधार है। अतः ऐसे कार्बनिक पदार्थ, जो जन्तुओं तथा मनुष्यों के शरीर की ठीक वृद्धि तथा उनकी जीवन-क्रियाओं के लिए अत्यन्त आवश्यक है, विटामिन कहलाते हैं। हॉपकिन्स ने कहा था कि विटामिन की उपस्थिति स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है। इनके अभाव से शरीर में विशेष रोग हो जाते हैं। मुख्य विटामिन ‘A’, ‘B’, ‘C’, ‘D’ तथा E
हैं ।
विटामिन ‘A’ इसका अणुसूत्र C20H 29OH है। इसका रासायनिक नाम रेटिनॉल या ऐक्सेरोफाइटॉल है। इसके मुख्य स्रोत दूध, मछली, पालक, सलाद, बन्दगोभी, धनिया, आम, पपीता, टमाटर, गाजर आदि हैं। इसकी कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है और रतौंधी (रात्रि का अन्धापन) नामक रोग हो जाता है।
विटामिन ‘B’- पहले इसको एक पदार्थ समझा जाता था, परन्तु आज 12 विटामिन ‘B’ ज्ञात हैं; जैसे-‘B₁’, ‘B₂’, ‘B’… ‘Be’…. ‘B12’। इनके मुख्य स्रोत दाल, अनाज के दाने, पत्तेदार तरकारियों, दूध के पदार्थ, गोश्त, अण्डे आदि है। विटामिन B₁ की कमी से त्वचा रोग, बेरी-बेरी, स्नायविक दोष हो जाते हैं।
विटामिन ‘C’- इसे ऐस्कॉर्बिक अम्ल भी कहते हैं। इसका अणुसूत्र C6H8O6 है। इसके मुख्य स्त्रोत नींबू, नारंगी, आँवला है। इसके अभाव में स्कर्वी नामक रोग हो जाता है।
विटामिन ‘D’- यह एक संकीर्ण पदार्थ है। इसमें कम-से-कम चार पदार्थ मिले होते हैं। इसके मुख्य स्रोत मक्खन, घी, अण्डे, मछली, सूर्य की पराबैगनी किरणें हैं। इसके अभाव में हड्डियाँ कमजोर पड़ जाती हैं और रिकेट नामक रोग हो जाता है। यह गर्भ में बच्चे के शरीर को स्वस्थ बनाने में उपयोगी है।
विटामिन ‘E’- यह प्रजनन विटामिन है। इसके मुख्य स्रोत गेहूँ, अण्डे, दूध, गोश्त आदि हैं। इसकी कमी से प्रजनन शक्ति क्षीण हो जाती है। इसकी कमी से जन्तु नपुंसक हो जाते हैं ।
–EXAM HACK FOR STUDENTS ——-
1- यूपी बोर्ड परीक्षा में सफलता के लिए सिलेबस को अच्छी तरह समझे और नियमित अभ्यास करें ।
2- पढ़ाई कि योजना बनाए जिसमे हर विषय के लिए समय हो समझो टॉपिक पर ज्यादा फॉक्स करे।
3- पेपर में पहले आसान सवाल हल करें सभी प्रश्नों के उत्तर दें बिन कोई छोड़ें।
4- परीक्षा में व्हाइटनर(whitener) का उपयोग न करें केवल काला(black), नीला (blue) पेन का उपयोग करें ।
