CLASS 12 Physics Chapter 6 important questions in Hindi
महत्त्वपूर्ण परिभाषाएं –
▶वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण- चुम्बकीय फ्लक्स परिवर्तन के कारण वैद्युत वाहक बल के प्रेरित होने की घटना को वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।
किसी परिपथ में उत्पन्न प्रेरित वैद्युत वाहक बल
e × -dø/dt
▶ लेन्ज का नियम-किसी परिपथ में प्रेरित वैद्युत वाहक बल अथवा प्रेरित धारा की दिशा सदैव इस प्रकार की होती है कि वह उस कारक का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।4
▶स्वप्रेरण-किसी कुण्डली में प्रवाहित वैद्युत धारा के मान में परिवर्तन के कारण कुण्डली में एक प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है। वैद्युत चुम्बकीय प्रेरण की इस घटना को स्वप्रेरण कहते हैं।
यदि किसी कुण्डली में फेरों की संख्या N व कुण्डली में प्रवाहित धारा i हो तो
Nø = Li अथवा L = Nø/i
— परीक्षा के दृष्टिकोण से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न —-
प्रश्न 1. चुम्बकीय फ्लक्स की परिभाषा दीजिए।
उत्तर : चुम्बकीय फ्लक्स- “यदि किसी एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् कोई तल लें, तो चुम्बकीय क्षेत्र (B) तथा तल के क्षेत्रफल (A) के गुणनफल को चुम्बकीय फ्लक्स कहते हैं।” इसे ” से प्रदर्शित करते हैं।
Ø = BA वेवर
प्रश्न 2. वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण क्या होता है? इस पर आधारित दो युक्तियों के नाम लिखिए।
अथवा
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण से क्या तात्पर्य है? [ 2026 Expected]
उत्तर : वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण- जब किसी कुण्डली तथा चुम्बक के बीच सापेक्ष गति होती है तो कुण्डली में वैद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है इस घटना को वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण तथा उत्पन्न वैद्युत वाहक बल को प्रेरित वैद्युत वाहक बल कहते हैं। वैद्युत जनित्र तथा ट्रांसफार्मर वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण पर आधारित युक्तियाँ हैं।
प्रश्न 3. लेन्ज का नियम क्या है? समझाइए कि लेन्ज का नियम ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है
उत्तर : लेन्ज का नियम- इस नियम के अनुसार, “किसी परिपथ में प्रेरित वैद्युत धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।”
लेन्ज का नियम एवं ऊर्जा संरक्षण- किसी चुम्बक तथा कुण्डली के बीच सापेक्ष गति कराने के लिए कुछ यान्त्रिक कार्य करना पड़ता है। यान्त्रिक कार्य करने में व्यय यान्त्रिक ऊर्जा ही, वैद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होकर प्रेरित वैद्युत वाहक बल तथा प्रेरित धारा के रूप में प्राप्त होती है। इस प्रकार ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में परवर्तित होती है। अतः लेन्ज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है।
प्रश्न 4. प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग के दाएँ हाथ का नियम बताइए।
[ Important]
उत्तर : प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग के दाएँ हाथ का नियम- “यदि दाएँ हाथ का अँगूठा, उसके पास की तर्जनी तथा मध्यमा अँगुलियों को परस्पर लम्बवत् फैलाकर इस प्रकार रखें कि तर्जनी अँगुली चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को तथा अँगूठा चालक की गति की दिशा को प्रदर्शित करे तो मध्यमा अँगुली प्रेरित वैद्युत धारा की दिशा को प्रदर्शित करेगी।”
प्रश्न 5. स्वप्रेरण गुणांक (अथवा स्वप्रेरकत्व) की परिभाषा व मात्रक लिखिए।
उत्तर : स्वप्रेरण गुणांक- “किसी कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक कुण्डली में चुम्बकीय फ्लक्स ग्रन्थियकाओं की संख्या के बराबर होता है, जबकि कुण्डली में 1 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है।” इसका मात्रक हेनरी है l
प्रश्न 6- चुम्बकीय फ्लक्स की परिभाषा लिखिए तथा इसका विमीय सूत्र लिखिए।
अथवा
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण से आप क्या समझते हैं? वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी फैराडे के नियमों को व्यक्त कीजिए।
उत्तर : चुम्बकीय फ्लक्स-एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित, किसी तल से लम्बवत् गुजरने वाली कुल चुम्बकीय फ्लक्स रेखाओं की संख्या को उस तल से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स कहते हैं। इसे ‘छ’ से प्रदर्शित करते हैं।
इसका मात्रक वेबर है तथा यह अदिश राशि है।
Ø = BA
वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण-जब किसी कुण्डली तथा चुम्बक के बीच सापेक्ष गति होती है तो कुण्डली में वैद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है इस घटना को वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण तथा उत्पन्न वैद्युत वाहक बल को प्रेरित वैद्युत वाहक बल कहते हैं। वैद्युत जनित्र तथा ट्रांसफार्मर वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण पर आधारित युक्तियाँ हैं।
फैराडे के वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के नियम- फैराडे ने वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के दो नियम दिए-
प्रथम नियम- “जब किसी वैद्युत परिपथ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो परिपथ में एक प्रेरित वैद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है।” इस प्रेरित वैद्युत वाहक बल का परिमाण, चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन की ऋणात्मक दर के बरावर होता है। इसे ‘न्यूमैन का नियम’ भी कहते हैं।
माना ∆t समयान्तराल में किसी परिपथ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में का परिवर्तन होता है तो परिपथ में ∆Ø
प्रेरित वैद्युत वाहक बल e = -∆ø/∆t
यदि परिपथ एक कुण्डली है, जिसमें तार के N फेरे हों तो पूरी कुण्डली में प्रेरित वैद्युत वाहक बल
e = -N∆ø/∆t वोल्ट
जहाँ Nø कुण्डली में फ्लक्स प्रन्थिकाओं की संख्या कहलाती है l
द्वितीय नियम “किसी परिपच में प्रेरित वैद्युत वाहक बल अथवा प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।” इसे ‘लेन्ज का नियम’ भी कहते हैं।.
प्रश्न 7. स्वप्रेरण तथा अन्योन्य प्रेरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : स्वप्रेरण और अन्योन्य प्रेरण में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
स्वप्रेरण (Self-Induction):
1. परिभाषा: जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन होता है, तो उसी कुंडली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) उत्पन्न हो जाता है। इस घटना को स्वप्रेरण कहते हैं।
2. कारण: यह कुंडली में स्वयं धारा परिवर्तन के कारण होता है।
3. निर्भरता: यह कुंडली के आकार, फेरों की संख्या और उसके अंदर के माध्यम पर निर्भर करता है।
4. उदाहरण: चोक कुंडली।
अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction):
1. परिभाषा: जब एक कुंडली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन होता है, तो उसके पास रखी दूसरी कुंडली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। इस घटना को अन्योन्य प्रेरण कहते हैं।
2. कारण: यह एक कुंडली में धारा परिवर्तन के कारण दूसरी कुंडली में होता है।
3. निर्भरता: यह दोनों कुंडलियों के आकार, फेरों की संख्या, उनके बीच की दूरी और उनके अंदर के माध्यम पर निर्भर करता है।
4. उदाहरण: ट्रांसफार्मर।
संक्षेप में, स्वप्रेरण एक ही कुंडली में होने वाली घटना है, जबकि अन्योन्य प्रेरण दो अलग-अलग कुंडलियों के बीच होने वाली घटना है। दोनों ही वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर आधारित हैं।
प्रश्न 8 – बल के पदों में वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण के फैराडे के नियम को समझाइए।
उत्तर : फैराडे के नियम की उत्पत्ति- फैराडे के प्रयोगों से स्पष्ट होता है, “जब किसी बन्द परिपथ, में से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो परिपथ में वैद्युत धारा प्रवाहित हो जाती है।” इसकी व्याख्या लॉरेन्ज बल के आधार पर की जा सकती है-
माना । लम्बाई की एक चालक छड़ JK (चित्र) एक U आकार के स्थिर चालक ABCD की भुजाओं पर चित्रानुसार वेग से दायीं ओर को चलाई जा रही है। माना यान्त्रिक घर्षण नगण्य है तथा U चालक एक ऐसे एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में स्थित है जो कि कागज के तल के लम्बवत् नीचे की ओर दिष्ट है। चालक छड़ JK की गति के कारण चालक छड़ में उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर एक चुम्बकीय (लॉरेन्ज) बल F m (= qvB ) कार्य करता है जोकि इलेक्ट्रॉनों को चालक छड़ के सिरे से K सिरे की ओर ले जाता है। चूंकि इलेक्ट्रॉनों को एक बन्द परिपथ उपलब्ध है, अतः वे मार्ग K -> C -> B -> J पर अनुगमन वेग से चलने लगते हैं। इस प्रकार परिपथ में जाती है जिसकी दिशा J -> B -> C -> K -> J (वामावर्त) है। जब तक चालक छड़ JK. को चुम्बकीय क्षेत्र में चलते रहना हैं तब तक परिपथ में धारा प्रवाहित होती रहती है। इससे यह स्पष्ट है कि गतिमान चालक छड़ में एक वैद्युत वाहक बल प्रेरित हो जाता है जो कि परिपथ में धारा बनाए रखता है। चूँकि चालक छड़ में प्रेरित वैद्युत वाहक बल चालक छड़ की ‘गति’ के कारण है, अतः इसे गतिक वैद्युत वाहक बल (Motional EMF) भी कहते हैं। इसकी उत्पत्ति का कारण अथवा प्रेरित धारा की उत्पत्ति का कारण गतिमान चालक छड़ में मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर लगने वाला लॉरेन्ज बल है।
चालक छड़ के दायीं ओर चलते रहने से परिपथ JBCKJ में से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स बढ़ता जाता है। इससे फैराडे के इस विचार की पुष्टि हो जाती है कि जब तक किसी परिपथ में से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स परिवर्तित होता रहता है तब तक परिपथ में धारा प्रेरित होती रहती है।
माना चालक (गतिमान) छड़ JK में प्रेरित वैद्युत वाहक बल e है तथा परिपथ में प्रेरित धारा है। हम यह जानते हैं कि जब एक धारावाही चालक किसी चुम्बकीय क्षेत्र में होता है तो उस पर एक बल लगता है जिसकी दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियमानुसार होती है। धारावाही चालक छड़ JK पर चुम्बकीय क्षेत्र Bद्वारा आरोपित बल
F’ = ilB
बल F’ की दिशा बायीं ओर को है, अतः चालक छड़ को एक नियत वेग से दायीं ओर को चलाए रखने के लिए इस पर F’ के बराबर एवं विपरीत बल F लगाना होगा।
F= -F’ =iBl
माना बल F के कारण चालक छड़ JK समयान्तराल ∆t में दूरी ∆x तय करती है तथा J’ K’ स्थिति में आ जाती है, अतः चालक छड़ पर किया गया कार्य W=Fx∆x = – ilB ∆x
∆x = वेग × समयान्तराल
= v x At W = ilBv∆t Bul (i x ∆t) i∆t = q परिपथ में ∆t समय में प्रवाहित आवेश W = – Bvlq
यह कार्य ही परिपथ में आवेश प्रवाह के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। किसी सेल द्वारा किसी परिपथ में एकांक आवेश को प्रवाहित करने में किया गया कार्य ही सेल का वैद्युत वाहक बल कहलाता है, अतः छड़ JK (जोकि परिपथ JBCK में एक सेल का कार्य कर रही है) में प्रेरित वैद्युत वाहक
समयान्तराल
∆t में परिपथ का क्षेत्रफल JBCK से बढ़कर J’ BCK’ हो जाता है, अतः इस समयान्तराल में परिपथ से गुजरने वाले चुम्बकीय में, परिवर्तन
∆ø= चुम्बकीय क्षेत्र × क्षेत्रफल में परिवर्तन (J J’ K’ K) .
= B(l∆x)
अतः चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर परन्तु
∆x/∆t
परन्तु ∆x/∆t = v (छड़ का वेग)
∆ø/∆t = Blv
समीकरण (1) व समीकरण (2) की तुलना करने पर,
e = – (∆ø)/( ∆t)
यदि ∆t→ 0 है तो e=- dø/dt
यही फैराडे का वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी द्वितीय नियम है।
—--EXAM HACK FOR STUDENTS ——-
1- यूपी बोर्ड परीक्षा में सफलता के लिए सिलेबस को अच्छी तरह समझे और नियमित अभ्यास करें ।
2- पढ़ाई कि योजना बनाए जिसमे हर विषय के लिए समय हो समझो टॉपिक पर ज्यादा फॉक्स करे।
3- पेपर में पहले आसान सवाल हल करें सभी प्रश्नों के उत्तर दें बिन कोई छोड़ें।
4- परीक्षा में व्हाइटनर(whitener) का उपयोग न करें केवल काला(black), नीला (blue) पेन का उपयोग करें ।
